यह रही कुषाण कालीन सिक्कों की प्रमुख विशेषताएँ:
1. बहुधार्मिक प्रतीक:
- कुषाण सिक्कों पर विभिन्न धार्मिक प्रतीकों और देवताओं की छवियाँ मिलती हैं।
- जैसे: शिव, बुद्ध, सूर्य देवता, नाना देवी आदि।
- साथ ही कुछ सिक्कों पर यूनानी-ईरानी देवता जैसे मित्र, ओमो, सेरो आदि भी चित्रित हैं।
2. त्रिभाषीय लिपि:
- सिक्कों पर ग्रीक, खरोष्ठी और ब्राह्मी लिपियाँ देखने को मिलती हैं।
- शुरुआती सिक्कों में ग्रीक लिपि प्रमुख थी, बाद में खरोष्ठी और ब्राह्मी का अधिक प्रयोग हुआ।
3. धातुएँ:
- सिक्के तीन मुख्य धातुओं से बनाए जाते थे:
- सोना: राजसी और धार्मिक महत्व के लिए।
- चांदी: वाणिज्यिक उपयोग में।
- तांबा: आम लोगों के लेन-देन के लिए।
4. राजाओं की मूर्तियाँ:
- सिक्कों पर शासक की चित्रित प्रतिमा होती थी, अक्सर युद्ध की मुद्रा में या किसी देवता के साथ।
5. उत्कृष्ट कला और मुद्रा प्रणाली:
- कुषाण सिक्के सुंदर और कलात्मक होते थे।
- उन्होंने भारत में स्वर्ण मुद्रा प्रणाली की नींव रखी, जो गुप्त काल में और विकसित हुई।
यदि चाहें तो मैं कनिष्क के विशिष्ट सिक्कों की छवियाँ या विवरण भी साझा कर सकता हूँ। क्या आप उनमें रुचि रखते हैं?
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