Explanation:
तोल्लकाप्पियम् संगम युग का सबसे प्राचीन और तमिल व्याकरण पर आधारित ग्रंथ है।
यह द्वितीय संगम (जो कपाटपुरम या अल में संपन्न हुआ था) का एकमात्र शेष ग्रंथ माना जाता है।
इस ग्रंथ की रचना तोल्लकाप्पियर नामक विद्वान ने की थी।
तोल्लकाप्पियम् केवल एक व्याकरण ग्रंथ ही नहीं है, बल्कि इसमें तमिल भाषा, काव्यशास्त्र, सामाजिक जीवन, रीति-रिवाज़ों और संस्कृति की भी विस्तृत झलक मिलती है।
यह ग्रंथ प्राचीन द्रविड़ सभ्यता और साहित्यिक परंपराओं को समझने का एक प्रमुख स्रोत है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(B) इतुतगोई:
यह कोई मान्यता प्राप्त संगमकालीन ग्रंथ नहीं है; संभवतः यह एक भ्रमपूर्ण या त्रुटिपूर्ण नाम है।
(C) पतुपाटु (Pattupattu):
यह संगम साहित्य का हिस्सा है, लेकिन यह तृतीय संगम काल से संबंधित है, और द्वितीय संगम का शेष ग्रंथ नहीं माना जाता।
(D) पदिनेकिल्कणक्कू (Pattinenkilkkanakku):
यह भी संगम उत्तरकालीन ग्रंथों का संग्रह है और इसमें नैतिक साहित्य शामिल है। यह द्वितीय संगम से संबंधित नहीं है।
निष्कर्ष:
द्वितीय संगम का एकमात्र शेष ग्रंथ 'तोल्लकाप्पियम्' है।
Explanation by: Mr. Dubey
तोल्लकाप्पियम् संगम युग का सबसे प्राचीन और तमिल व्याकरण पर आधारित ग्रंथ है।
यह द्वितीय संगम (जो कपाटपुरम या अल में संपन्न हुआ था) का एकमात्र शेष ग्रंथ माना जाता है।
इस ग्रंथ की रचना तोल्लकाप्पियर नामक विद्वान ने की थी।
तोल्लकाप्पियम् केवल एक व्याकरण ग्रंथ ही नहीं है, बल्कि इसमें तमिल भाषा, काव्यशास्त्र, सामाजिक जीवन, रीति-रिवाज़ों और संस्कृति की भी विस्तृत झलक मिलती है।
यह ग्रंथ प्राचीन द्रविड़ सभ्यता और साहित्यिक परंपराओं को समझने का एक प्रमुख स्रोत है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(B) इतुतगोई:
यह कोई मान्यता प्राप्त संगमकालीन ग्रंथ नहीं है; संभवतः यह एक भ्रमपूर्ण या त्रुटिपूर्ण नाम है।
(C) पतुपाटु (Pattupattu):
यह संगम साहित्य का हिस्सा है, लेकिन यह तृतीय संगम काल से संबंधित है, और द्वितीय संगम का शेष ग्रंथ नहीं माना जाता।
(D) पदिनेकिल्कणक्कू (Pattinenkilkkanakku):
यह भी संगम उत्तरकालीन ग्रंथों का संग्रह है और इसमें नैतिक साहित्य शामिल है। यह द्वितीय संगम से संबंधित नहीं है।
निष्कर्ष:
द्वितीय संगम का एकमात्र शेष ग्रंथ 'तोल्लकाप्पियम्' है।