Explanation:
वर्तमान में सही उत्तर: (D) 5 वर्ष
Jammu and Kashmir Reorganization Act 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्ष से बदलकर 5 वर्ष कर दिया गया है।
नोट:
Explanation:
भारत की संसदीय व्यवस्था में मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) सामूहिक रूप से केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
इसलिए यदि लोकसभा को सरकार पर विश्वास नहीं रहता, तो वह अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) ला सकती है।
यदि अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में पारित हो जाता है, तो प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।
राज्यसभा में अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जाता, क्योंकि सरकार राज्यसभा के प्रति उत्तरदायी नहीं होती।
इसलिए सही उत्तर है:
(B) लोकसभा
Explanation:
सही उत्तर है: (A) एक तिहाई
73वे सविधान संशोधन के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में:
इसलिए सही विकल्प है: (A) एक तिहाई।
Explanation:
Subhas Chandra Bose ने अंग्रेजों के विरुद्ध अपना आंदोलन और Indian National Army का नेतृत्व सिंगापुर से संगठित रूप में आरम्भ किया था।
उन्होंने 1943 में सिंगापुर पहुँचकर आजाद हिन्द फौज (INA) को पुनर्गठित किया और “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” का प्रसिद्ध नारा दिया।
इसलिए सही विकल्प है: (D) सिंगापुर।
Explanation:
सही उत्तर है: (B) बन्दी प्रत्यक्षीकरण
Habeas Corpus का हिंदी अर्थ “बन्दी प्रत्यक्षीकरण” होता है।
यह रिट तब जारी की जाती है जब किसी व्यक्ति को गलत तरीके से हिरासत (Illegal Detention) में रखा गया हो।
न्यायालय आदेश देता है कि बंदी को अदालत के सामने प्रस्तुत किया जाए और हिरासत का कारण बताया जाए।
संक्षेप में अन्य रिट:
परमादेश (Mandamus) → सरकारी अधिकारी को कर्तव्य पालन का आदेश।
निषेध (Prohibition) → निचली अदालत को कार्य रोकने का आदेश।
अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) → किसी पद पर अधिकार पूछने हेतु।
Explanation:
को मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (Montford Reforms) भी कहा जाता है। यह अधिनियम भारत में सीमित स्वशासन (self-government) देने के उद्देश्य से बनाया गया था।
इस अधिनियम के तहत पहली बार केंद्र में द्विसदनीय विधानमंडल (Bicameral Legislature) की व्यवस्था की गई:
राज्य परिषद (Council of State)
विधानसभा परिषद / केंद्रीय विधानसभा (Legislative Assembly)
इसलिए सही उत्तर है:
➡️ Option (D) — 5 वर्ष, 3 वर्ष।
Explanation:
ये सवाल भारतीय संविधान के इतिहास का एक फेमस सवाल है ?
उत्तर: 26वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा
थोड़ा एक्सप्लेनेशन:
1. प्रिवि पर्स क्या था?
भारत के विलय के समय 1947-49 में रियासतों के शासकों को उनके राज्य सरकार में विलय के बदले केंद्र सरकार से सालाना एक निश्चित भत्ता दिया जाता था। इसे ही प्रिवि पर्स कहते थे।
2. क्यों समाप्त किया गया?
इंदिरा गांधी सरकार का तर्क था कि यह सामंतवाद का प्रतीक है और संविधान की समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
3. 26वां संशोधन, 1971
इस संशोधन द्वारा संविधान से अनुच्छेद 291 और 362 को हटा दिया गया।
- अनुच्छेद 291: प्रिवि पर्स की गारंटी देता था
- अनुच्छेद 362: रियासतों के शासकों के अधिकारों की गारंटी देता था
साथ ही संविधान में अनुच्छेद 363A जोड़ा गया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि अब शासकों को कोई विशेष अधिकार या प्रिवि पर्स नहीं मिलेगा।
नोट: 1970 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवि पर्स समाप्त करने के राष्ट्रपति के आदेश को अवैध ठहरा दिया था। इसी को पलटने के लिए 26वां संशोधन लाया गया।
तो MCQ में सही ऑप्शन 26वां संशोधन अधिनियम, 1971 होगा ✅
Explanation:
ये सवाल भारतीय संविधान के *अनुच्छेद 71* और *de facto officer doctrine* से जुड़ा है।
सवाल का मतलब:
अगर किसी व्यक्ति का राष्ट्रपति के रूप में चुनाव बाद में अवैध घोषित कर दिया जाए, तो उसके द्वारा अवैध घोषित होने से पहले किए गए कृत्यों की वैधता क्या होगी?
उत्तर:
1. संविधान का प्रावधान - अनुच्छेद 71
अनुच्छेद 71(1) कहता है कि राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित सभी विवादों का निपटारा सुप्रीम कोर्ट करेगा।
अनुच्छेद 71(2) के अनुसार, अगर सुप्रीम कोर्ट चुनाव को अवैध घोषित कर देता है, तो उस निर्णय की तिथि से संबंधित व्यक्ति का पद स्वतः समाप्त हो जाएगा।
2. पूर्व के कृत्यों की वैधता - De Facto Doctrine
संविधान में इसका सीधा उल्लेख नहीं है, लेकिन भारतीय कानून "de facto officer" के सिद्धांत को मानता है। इसका मतलब:
- जब तक सुप्रीम कोर्ट चुनाव को अवैध घोषित नहीं करता, तब तक वह व्यक्ति de facto राष्ट्रपति माना जाता है।
- De facto officer के रूप में उसने सद्भावना से जो भी कार्य किए हैं, वे वैध और बाध्यकारी रहते हैं।
- कारण: सार्वजनिक हित, प्रशासनिक निरंतरता और तीसरे पक्ष के अधिकारों की रक्षा।
अगर हर कार्य को उलट दिया जाए तो सरकार का पूरा कामकाज अस्त-व्यस्त हो जाएगा।
3. व्यावहारिक स्थिति
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अंतिम और अनिवार्य होता है।
- निर्णय के बाद व्यक्ति तुरंत पद से हट जाता है।
- लेकिन निर्णय से पहले किए गए आदेश, नियुक्तियाँ, हस्ताक्षरित बिल आदि वैध माने जाते हैं, जब तक कोई अन्य कानून उन्हें अमान्य न कर दे।
संक्षेप में:
चुनाव अवैध घोषित होने पर व्यक्ति तुरंत पद से हट जाता है, लेकिन उसने अवैध घोषित होने से पहले जो कार्य किए हैं, वे वैध रहते हैं। यह de facto doctrine और प्रशासनिक आवश्यकता पर आधारित है।
यह सवाल UPSC और न्यायिक परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।
Explanation: पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन लगभग 21% पाई जाती है, जो जीवों के श्वसन के लिए आवश्यक है।