📊 Politics
Q. . किसी व्यक्ति के राष्ट्रपति के रूप में चुनाव को अवैध घोषित किये जाने की स्थिति में उसके द्वारा अपना चुनाव अवैध घोषित किये जाने के पूर्व के कृत्यों की क्या संवैधानिकता होगी ?
  • (A) यह कृत्य अविधिमान्य होंगे
  • (B) यह कृत्य विधिमान्य होंगे
  • (C) उन कृत्यों की पुष्टि उसके उत्तराधिकारी द्वारा की जानी आवश्यक है
  • (D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
✅ Correct Answer: (B) यह कृत्य विधिमान्य होंगे

Explanation:

ये सवाल भारतीय संविधान के *अनुच्छेद 71* और *de facto officer doctrine* से जुड़ा है।

सवाल का मतलब:
अगर किसी व्यक्ति का राष्ट्रपति के रूप में चुनाव बाद में अवैध घोषित कर दिया जाए, तो उसके द्वारा अवैध घोषित होने से पहले किए गए कृत्यों की वैधता क्या होगी?

उत्तर:

1. संविधान का प्रावधान - अनुच्छेद 71
अनुच्छेद 71(1) कहता है कि राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित सभी विवादों का निपटारा सुप्रीम कोर्ट करेगा।
अनुच्छेद 71(2) के अनुसार, अगर सुप्रीम कोर्ट चुनाव को अवैध घोषित कर देता है, तो उस निर्णय की तिथि से संबंधित व्यक्ति का पद स्वतः समाप्त हो जाएगा। 

2. पूर्व के कृत्यों की वैधता - De Facto Doctrine
संविधान में इसका सीधा उल्लेख नहीं है, लेकिन भारतीय कानून "de facto officer" के सिद्धांत को मानता है। इसका मतलब:

- जब तक सुप्रीम कोर्ट चुनाव को अवैध घोषित नहीं करता, तब तक वह व्यक्ति de facto राष्ट्रपति माना जाता है।
- De facto officer के रूप में उसने सद्भावना से जो भी कार्य किए हैं, वे वैध और बाध्यकारी रहते हैं।
- कारण: सार्वजनिक हित, प्रशासनिक निरंतरता और तीसरे पक्ष के अधिकारों की रक्षा।

अगर हर कार्य को उलट दिया जाए तो सरकार का पूरा कामकाज अस्त-व्यस्त हो जाएगा।

3. व्यावहारिक स्थिति
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अंतिम और अनिवार्य होता है।
- निर्णय के बाद व्यक्ति तुरंत पद से हट जाता है।
- लेकिन निर्णय से पहले किए गए आदेश, नियुक्तियाँ, हस्ताक्षरित बिल आदि वैध माने जाते हैं, जब तक कोई अन्य कानून उन्हें अमान्य न कर दे। 

संक्षेप में:
चुनाव अवैध घोषित होने पर व्यक्ति तुरंत पद से हट जाता है, लेकिन उसने अवैध घोषित होने से पहले जो कार्य किए हैं, वे वैध रहते हैं। यह de facto doctrine और प्रशासनिक आवश्यकता पर आधारित है।

यह सवाल UPSC और न्यायिक परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।

Explanation by: Mr. Dubey

ये सवाल भारतीय संविधान के *अनुच्छेद 71* और *de facto officer doctrine* से जुड़ा है।

सवाल का मतलब:
अगर किसी व्यक्ति का राष्ट्रपति के रूप में चुनाव बाद में अवैध घोषित कर दिया जाए, तो उसके द्वारा अवैध घोषित होने से पहले किए गए कृत्यों की वैधता क्या होगी?

उत्तर:

1. संविधान का प्रावधान - अनुच्छेद 71
अनुच्छेद 71(1) कहता है कि राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित सभी विवादों का निपटारा सुप्रीम कोर्ट करेगा।
अनुच्छेद 71(2) के अनुसार, अगर सुप्रीम कोर्ट चुनाव को अवैध घोषित कर देता है, तो उस निर्णय की तिथि से संबंधित व्यक्ति का पद स्वतः समाप्त हो जाएगा। 

2. पूर्व के कृत्यों की वैधता - De Facto Doctrine
संविधान में इसका सीधा उल्लेख नहीं है, लेकिन भारतीय कानून "de facto officer" के सिद्धांत को मानता है। इसका मतलब:

- जब तक सुप्रीम कोर्ट चुनाव को अवैध घोषित नहीं करता, तब तक वह व्यक्ति de facto राष्ट्रपति माना जाता है।
- De facto officer के रूप में उसने सद्भावना से जो भी कार्य किए हैं, वे वैध और बाध्यकारी रहते हैं।
- कारण: सार्वजनिक हित, प्रशासनिक निरंतरता और तीसरे पक्ष के अधिकारों की रक्षा।

अगर हर कार्य को उलट दिया जाए तो सरकार का पूरा कामकाज अस्त-व्यस्त हो जाएगा।

3. व्यावहारिक स्थिति
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अंतिम और अनिवार्य होता है।
- निर्णय के बाद व्यक्ति तुरंत पद से हट जाता है।
- लेकिन निर्णय से पहले किए गए आदेश, नियुक्तियाँ, हस्ताक्षरित बिल आदि वैध माने जाते हैं, जब तक कोई अन्य कानून उन्हें अमान्य न कर दे। 

संक्षेप में:
चुनाव अवैध घोषित होने पर व्यक्ति तुरंत पद से हट जाता है, लेकिन उसने अवैध घोषित होने से पहले जो कार्य किए हैं, वे वैध रहते हैं। यह de facto doctrine और प्रशासनिक आवश्यकता पर आधारित है।

यह सवाल UPSC और न्यायिक परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।

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