Explanation:
सर अलेक्जेंडर कनिंघम को "भारतीय पुरातत्व का जनक" (Father of Indian Archaeology) कहा जाता है।
उन्होंने 1861 में भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग (Archaeological Survey of India - ASI) की स्थापना की और इसके पहले महानिदेशक बने।
कनिंघम ने भारत के प्राचीन अवशेषों, स्थापत्य, सिक्कों और ऐतिहासिक स्थलों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने कई स्थलों की खुदाई कराई, जिनमें सांची, सारनाथ, कौशांबी, और भरहुत जैसे स्थान शामिल हैं।
उनके द्वारा संकलित जानकारी ने भारतीय इतिहास और संस्कृति को समझने में नई दिशा दी।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(A) जेम्स प्रिंसेप:
वे प्रसिद्ध एपिग्राफिस्ट (शिलालेख विशेषज्ञ) थे, जिन्होंने ब्रह्मी लिपि को पढ़ने में सफलता पाई, लेकिन उन्हें "भारतीय पुरातत्व का जनक" नहीं कहा जाता।
(B) मॉर्टिमर व्हीलर:
वे एक ब्रिटिश पुरातत्वविद् थे और बाद में ASI के महानिदेशक बने। उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया, पर वे कनिंघम से बाद के समय के हैं।
(D) जॉन मार्शल:
उन्होंने मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई करवाई और सिंधु घाटी सभ्यता को उजागर किया, लेकिन "भारतीय पुरातत्व का जनक" नहीं कहलाते।
निष्कर्ष:
"भारतीय पुरातत्व का जनक" अलेक्जेंडर कनिंघम को कहा जाता है।
Explanation by: Mr. Dubey
सर अलेक्जेंडर कनिंघम को "भारतीय पुरातत्व का जनक" (Father of Indian Archaeology) कहा जाता है।
उन्होंने 1861 में भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग (Archaeological Survey of India - ASI) की स्थापना की और इसके पहले महानिदेशक बने।
कनिंघम ने भारत के प्राचीन अवशेषों, स्थापत्य, सिक्कों और ऐतिहासिक स्थलों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने कई स्थलों की खुदाई कराई, जिनमें सांची, सारनाथ, कौशांबी, और भरहुत जैसे स्थान शामिल हैं।
उनके द्वारा संकलित जानकारी ने भारतीय इतिहास और संस्कृति को समझने में नई दिशा दी।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(A) जेम्स प्रिंसेप:
वे प्रसिद्ध एपिग्राफिस्ट (शिलालेख विशेषज्ञ) थे, जिन्होंने ब्रह्मी लिपि को पढ़ने में सफलता पाई, लेकिन उन्हें "भारतीय पुरातत्व का जनक" नहीं कहा जाता।
(B) मॉर्टिमर व्हीलर:
वे एक ब्रिटिश पुरातत्वविद् थे और बाद में ASI के महानिदेशक बने। उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया, पर वे कनिंघम से बाद के समय के हैं।
(D) जॉन मार्शल:
उन्होंने मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई करवाई और सिंधु घाटी सभ्यता को उजागर किया, लेकिन "भारतीय पुरातत्व का जनक" नहीं कहलाते।
निष्कर्ष:
"भारतीय पुरातत्व का जनक" अलेक्जेंडर कनिंघम को कहा जाता है।