Explanation:
पानीपत का तीसरा युद्ध 14 जनवरी 1761 ई. को लड़ा गया था।
यह युद्ध अहमद शाह अब्दाली (अफगान शासक) और मराठों के बीच हुआ था।
मराठों का नेतृत्व पेशवा बालाजी बाजीराव के चचेरे भाई सदाशिवराव भाऊ और उनके साथ पेशवा के पुत्र विश्वासराव कर रहे थे।
यह युद्ध भारतीय इतिहास का एक निर्णायक मोड़ था, क्योंकि इसमें मराठों को भारी पराजय का सामना करना पड़ा और उनकी शक्ति को गहरा झटका लगा।
यह युद्ध न केवल रक्तरंजित था (लाखों की संख्या में हानि हुई), बल्कि इसके बाद भारत की सत्ता की रिक्तता का लाभ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने उठाया।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(B) 1771 ई.:
यह कोई प्रमुख युद्ध वर्ष नहीं है और पानीपत के युद्धों से संबंधित नहीं है।
(C) 1556 ई.:
यह पानीपत का दूसरा युद्ध था, जो अकबर और हेमू के बीच लड़ा गया था।
(D) 1576 ई.:
यह वर्ष हल्दीघाटी का युद्ध (अकबर और महाराणा प्रताप के बीच) से संबंधित है, न कि पानीपत युद्ध से।
निष्कर्ष:
पानीपत का तीसरा और अंतिम युद्ध 1761 ई. में लड़ा गया था।
Explanation by: Mr. Dubey
पानीपत का तीसरा युद्ध 14 जनवरी 1761 ई. को लड़ा गया था।
यह युद्ध अहमद शाह अब्दाली (अफगान शासक) और मराठों के बीच हुआ था।
मराठों का नेतृत्व पेशवा बालाजी बाजीराव के चचेरे भाई सदाशिवराव भाऊ और उनके साथ पेशवा के पुत्र विश्वासराव कर रहे थे।
यह युद्ध भारतीय इतिहास का एक निर्णायक मोड़ था, क्योंकि इसमें मराठों को भारी पराजय का सामना करना पड़ा और उनकी शक्ति को गहरा झटका लगा।
यह युद्ध न केवल रक्तरंजित था (लाखों की संख्या में हानि हुई), बल्कि इसके बाद भारत की सत्ता की रिक्तता का लाभ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने उठाया।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(B) 1771 ई.:
यह कोई प्रमुख युद्ध वर्ष नहीं है और पानीपत के युद्धों से संबंधित नहीं है।
(C) 1556 ई.:
यह पानीपत का दूसरा युद्ध था, जो अकबर और हेमू के बीच लड़ा गया था।
(D) 1576 ई.:
यह वर्ष हल्दीघाटी का युद्ध (अकबर और महाराणा प्रताप के बीच) से संबंधित है, न कि पानीपत युद्ध से।
निष्कर्ष:
पानीपत का तीसरा और अंतिम युद्ध 1761 ई. में लड़ा गया था।