Explanation:
त्रैकूटक संवत को ही इतिहास में कल्चुरि संवत के नाम से जाना जाता है।
- यह संवत लगभग 248 ईस्वी में प्रारंभ हुआ था।
- इसे सबसे पहले त्रैकूटक वंश के शासकों ने अपनाया था।
- बाद में कल्चुरि वंश ने इस संवत का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया, इसलिए यह "कल्चुरि संवत" के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
- यह संवत मुख्यतः मध्यभारत (वर्तमान मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़) के शिलालेखों और अभिलेखों में मिलता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(A) शक संवत:
शक संवत 78 ई. में शुरू हुआ, और यह भारत सरकार द्वारा प्रयुक्त आधिकारिक संवत है, लेकिन इसका संबंध कल्चुरियों से नहीं है।
(B) विक्रम संवत:
विक्रम संवत 57 ई.पू. में प्रारंभ हुआ था और इसका संबंध राजा विक्रमादित्य से है, न कि कल्चुरियों से।
(D) इनमें से कोई नहीं:
यह गलत है क्योंकि विकल्प (C) ही सही उत्तर है।
निष्कर्ष:
त्रैकूटक संवत को ही बाद में कल्चुरि संवत कहा गया क्योंकि इसका प्रयोग कल्चुरियों ने प्रमुख रूप से किया।
Explanation by: Mr. Dubey
त्रैकूटक संवत को ही इतिहास में कल्चुरि संवत के नाम से जाना जाता है।
- यह संवत लगभग 248 ईस्वी में प्रारंभ हुआ था।
- इसे सबसे पहले त्रैकूटक वंश के शासकों ने अपनाया था।
- बाद में कल्चुरि वंश ने इस संवत का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया, इसलिए यह "कल्चुरि संवत" के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
- यह संवत मुख्यतः मध्यभारत (वर्तमान मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़) के शिलालेखों और अभिलेखों में मिलता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(A) शक संवत:
शक संवत 78 ई. में शुरू हुआ, और यह भारत सरकार द्वारा प्रयुक्त आधिकारिक संवत है, लेकिन इसका संबंध कल्चुरियों से नहीं है।
(B) विक्रम संवत:
विक्रम संवत 57 ई.पू. में प्रारंभ हुआ था और इसका संबंध राजा विक्रमादित्य से है, न कि कल्चुरियों से।
(D) इनमें से कोई नहीं:
यह गलत है क्योंकि विकल्प (C) ही सही उत्तर है।
निष्कर्ष:
त्रैकूटक संवत को ही बाद में कल्चुरि संवत कहा गया क्योंकि इसका प्रयोग कल्चुरियों ने प्रमुख रूप से किया।