Explanation:
दादाभाई नौरोजी (1825–1917), जिन्हें "भारत का ग्रैंड ओल्ड मैन" कहा जाता है, ब्रिटिश संसद के पहले भारतीय सदस्य थे।
वह 1892 में ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए चुने गए थे। उन्होंने लिबरल पार्टी की ओर से चुनाव लड़ा और Finsbury Central निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की।
उन्होंने ब्रिटिश संसद में भारत के आर्थिक शोषण की बात उठाई और "ड्रेन ऑफ वेल्थ" (धन की निकासी) का सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिससे ब्रिटिश शासन की आलोचना हुई।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(A) डब्लू. सी. बनर्जी:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष थे, लेकिन ब्रिटिश संसद में कभी सदस्य नहीं बने।
(B) सर एस. पी. सिन्हा:
वह बाद में 1919 में हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य बने थे, लेकिन दादाभाई नौरोजी पहले थे।
(D) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी:
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता थे, लेकिन ब्रिटिश संसद के सदस्य नहीं बने।
निष्कर्ष:
ब्रिटिश संसद के पहले भारतीय सदस्य दादाभाई नौरोजी थे, जिन्होंने 1892 में हाउस ऑफ कॉमन्स में प्रवेश किया।
Explanation by: Mr. Dubey
दादाभाई नौरोजी (1825–1917), जिन्हें "भारत का ग्रैंड ओल्ड मैन" कहा जाता है, ब्रिटिश संसद के पहले भारतीय सदस्य थे।
वह 1892 में ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए चुने गए थे। उन्होंने लिबरल पार्टी की ओर से चुनाव लड़ा और Finsbury Central निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की।
उन्होंने ब्रिटिश संसद में भारत के आर्थिक शोषण की बात उठाई और "ड्रेन ऑफ वेल्थ" (धन की निकासी) का सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिससे ब्रिटिश शासन की आलोचना हुई।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(A) डब्लू. सी. बनर्जी:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष थे, लेकिन ब्रिटिश संसद में कभी सदस्य नहीं बने।
(B) सर एस. पी. सिन्हा:
वह बाद में 1919 में हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य बने थे, लेकिन दादाभाई नौरोजी पहले थे।
(D) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी:
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता थे, लेकिन ब्रिटिश संसद के सदस्य नहीं बने।
निष्कर्ष:
ब्रिटिश संसद के पहले भारतीय सदस्य दादाभाई नौरोजी थे, जिन्होंने 1892 में हाउस ऑफ कॉमन्स में प्रवेश किया।