Explanation:
मृगतृष्णा (Mirage) एक दृष्टि भ्रांति है, जो आमतौर पर गर्म रेगिस्तानी इलाकों या सड़क पर देखने को मिलती है। ऐसा तब होता है जब प्रकाश की किरणें गर्म हवा की परतों से गुजरते हुए पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection - TIR) का शिकार होती हैं।
मृगतृष्णा कैसे बनती है?
- जब सूर्य की गर्मी से सड़क या रेगिस्तान की सतह बहुत गर्म हो जाती है, तो वहां की नीचे की हवा हल्की (कम घनत्व वाली) और ऊपर की हवा ठंडी (अधिक घनत्व वाली) होती है।
- जब किसी वस्तु (जैसे आसमान या पेड़) से आने वाली प्रकाश किरणें ठंडी हवा से गर्म हवा में प्रवेश करती हैं, तो वे अपवर्तन के कारण मुड़ने लगती हैं।
- कोई एक सीमा कोण (Critical Angle) आने पर, प्रकाश की किरणें पूरी तरह परावर्तित हो जाती हैं, जिससे दूर से ऐसा लगता है कि वहाँ पानी की सतह है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- (A) अपवर्तन (Refraction): प्रकाश के एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर मुड़ने की प्रक्रिया है, लेकिन मृगतृष्णा का मुख्य कारण पूर्ण आंतरिक परावर्तन है।
- (C) प्रकीर्णन (Scattering): यह तब होता है जब प्रकाश की किरणें धूल या गैस के कणों से टकराकर चारों ओर फैल जाती हैं (जैसे – आकाश का नीला रंग), लेकिन मृगतृष्णा इससे संबंधित नहीं है।
- (D) विवर्तन (Diffraction): यह तब होता है जब प्रकाश किसी छोटे अवरोध (obstacle) या संकीर्ण छिद्र से गुजरने पर मुड़ता है, लेकिन मृगतृष्णा में यह प्रभाव नहीं दिखता।
निष्कर्ष:
मृगतृष्णा (Mirage) पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) का उदाहरण है।
Explanation by: Kirti
मृगतृष्णा (Mirage) एक दृष्टि भ्रांति है, जो आमतौर पर गर्म रेगिस्तानी इलाकों या सड़क पर देखने को मिलती है। ऐसा तब होता है जब प्रकाश की किरणें गर्म हवा की परतों से गुजरते हुए पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection - TIR) का शिकार होती हैं।
मृगतृष्णा कैसे बनती है?
- जब सूर्य की गर्मी से सड़क या रेगिस्तान की सतह बहुत गर्म हो जाती है, तो वहां की नीचे की हवा हल्की (कम घनत्व वाली) और ऊपर की हवा ठंडी (अधिक घनत्व वाली) होती है।
- जब किसी वस्तु (जैसे आसमान या पेड़) से आने वाली प्रकाश किरणें ठंडी हवा से गर्म हवा में प्रवेश करती हैं, तो वे अपवर्तन के कारण मुड़ने लगती हैं।
- कोई एक सीमा कोण (Critical Angle) आने पर, प्रकाश की किरणें पूरी तरह परावर्तित हो जाती हैं, जिससे दूर से ऐसा लगता है कि वहाँ पानी की सतह है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- (A) अपवर्तन (Refraction): प्रकाश के एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर मुड़ने की प्रक्रिया है, लेकिन मृगतृष्णा का मुख्य कारण पूर्ण आंतरिक परावर्तन है।
- (C) प्रकीर्णन (Scattering): यह तब होता है जब प्रकाश की किरणें धूल या गैस के कणों से टकराकर चारों ओर फैल जाती हैं (जैसे – आकाश का नीला रंग), लेकिन मृगतृष्णा इससे संबंधित नहीं है।
- (D) विवर्तन (Diffraction): यह तब होता है जब प्रकाश किसी छोटे अवरोध (obstacle) या संकीर्ण छिद्र से गुजरने पर मुड़ता है, लेकिन मृगतृष्णा में यह प्रभाव नहीं दिखता।
निष्कर्ष:
मृगतृष्णा (Mirage) पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) का उदाहरण है।