Explanation:
ऋग्वेद में 'अघन्य' शब्द का अर्थ होता है – "जिसे मारा न जाए" या "जो वध के योग्य नहीं हो"।
यह शब्द गायों के लिए प्रयोग किया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वेदिक काल में गायों को पवित्र माना जाता था और उनके वध को अनुचित समझा जाता था।
ऋग्वेद में गाय को 'अघन्या', 'धेनु', 'अहीन', आदि नामों से संबोधित किया गया है।
गाय उस समय धन, समृद्धि और कृषि का प्रमुख आधार थी। इसलिए इसे मारना पाप समझा जाता था।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(A) ब्राह्मण:
ब्राह्मणों के लिए 'द्विज', 'विप्र', 'ऋषि' आदि शब्द प्रयुक्त हुए हैं, लेकिन 'अघन्य' नहीं। इसलिए यह विकल्प गलत है।
(B) पुरोहित:
पुरोहित वेदपाठी और यज्ञ कराने वाले होते थे, परंतु उनके लिए भी 'अघन्य' शब्द नहीं आया है।
(C) स्त्री:
स्त्रियों के लिए वेदों में 'नारी', 'योषा', 'पत्नी' आदि शब्दों का प्रयोग मिलता है, लेकिन 'अघन्य' नहीं।
निष्कर्ष:
'अघन्य' शब्द का प्रयोग ऋग्वेद में गाय के लिए किया गया था, जिससे यह सिद्ध होता है कि उस समय गाय का विशेष धार्मिक और आर्थिक महत्व था।
Explanation by: Mr. Dubey
ऋग्वेद में 'अघन्य' शब्द का अर्थ होता है – "जिसे मारा न जाए" या "जो वध के योग्य नहीं हो"।
यह शब्द गायों के लिए प्रयोग किया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वेदिक काल में गायों को पवित्र माना जाता था और उनके वध को अनुचित समझा जाता था।
ऋग्वेद में गाय को 'अघन्या', 'धेनु', 'अहीन', आदि नामों से संबोधित किया गया है।
गाय उस समय धन, समृद्धि और कृषि का प्रमुख आधार थी। इसलिए इसे मारना पाप समझा जाता था।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(A) ब्राह्मण:
ब्राह्मणों के लिए 'द्विज', 'विप्र', 'ऋषि' आदि शब्द प्रयुक्त हुए हैं, लेकिन 'अघन्य' नहीं। इसलिए यह विकल्प गलत है।
(B) पुरोहित:
पुरोहित वेदपाठी और यज्ञ कराने वाले होते थे, परंतु उनके लिए भी 'अघन्य' शब्द नहीं आया है।
(C) स्त्री:
स्त्रियों के लिए वेदों में 'नारी', 'योषा', 'पत्नी' आदि शब्दों का प्रयोग मिलता है, लेकिन 'अघन्य' नहीं।
निष्कर्ष:
'अघन्य' शब्द का प्रयोग ऋग्वेद में गाय के लिए किया गया था, जिससे यह सिद्ध होता है कि उस समय गाय का विशेष धार्मिक और आर्थिक महत्व था।