Q. गायत्री मंत्र की रचना किसने की थी ?
✅ Correct Answer: (B)
विश्वामित्र
Explanation: गायत्री मंत्र का विवरण:
गायत्री मंत्र की रचना महर्षि विश्वामित्र ने की थी।
यह ऋग्वेद (3.62.10) में वर्णित है।
इसे वेदों का सबसे पवित्र मंत्र माना जाता है।
इस मंत्र में सूर्य देव (सावित्री) की उपासना की गई है, इसलिए इसे सावित्री मंत्र भी कहते हैं।
गायत्री मंत्र:
ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥
महत्व:
यह मंत्र बुद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति को जाग्रत करने के लिए जपा जाता है।
इसे सर्वोत्तम मंत्र माना जाता है और इसे जपने से व्यक्ति के मन और आत्मा की शुद्धि होती है।
Explanation by: Mr. Dubey
गायत्री मंत्र का विवरण:
गायत्री मंत्र की रचना महर्षि विश्वामित्र ने की थी।
यह ऋग्वेद (3.62.10) में वर्णित है।
इसे वेदों का सबसे पवित्र मंत्र माना जाता है।
इस मंत्र में सूर्य देव (सावित्री) की उपासना की गई है, इसलिए इसे सावित्री मंत्र भी कहते हैं।
गायत्री मंत्र:
ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥
महत्व:
यह मंत्र बुद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति को जाग्रत करने के लिए जपा जाता है।
इसे सर्वोत्तम मंत्र माना जाता है और इसे जपने से व्यक्ति के मन और आत्मा की शुद्धि होती है।
गायत्री मंत्र की रचना महर्षि विश्वामित्र ने की थी।
यह ऋग्वेद (3.62.10) में वर्णित है।
इसे वेदों का सबसे पवित्र मंत्र माना जाता है।
इस मंत्र में सूर्य देव (सावित्री) की उपासना की गई है, इसलिए इसे सावित्री मंत्र भी कहते हैं।
गायत्री मंत्र:
ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥
महत्व:
यह मंत्र बुद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति को जाग्रत करने के लिए जपा जाता है।
इसे सर्वोत्तम मंत्र माना जाता है और इसे जपने से व्यक्ति के मन और आत्मा की शुद्धि होती है।