Explanation: प्रकाश का वेग सर्वप्रथम (A) रोमर ने ज्ञात किया।
डेनमार्क के खगोलशास्त्री ओले रोमर (Ole Rømer) ने 1676 में बृहस्पति के एक उपग्रह Io के ग्रहणों का अध्ययन करते हुए पहली बार प्रकाश की गति का अनुमान लगाया।
रोमर का प्रयोग:
उन्होंने पाया कि जब पृथ्वी बृहस्पति के निकट होती है, तो Io का ग्रहण अपेक्षित समय पर होता है।
लेकिन जब पृथ्वी बृहस्पति से दूर होती है, तो Io के ग्रहणों में विलंब हो जाता है।
इस विलंब का कारण पृथ्वी और बृहस्पति के बीच की दूरी में परिवर्तन था।
रोमर ने इस आधार पर अनुमान लगाया कि प्रकाश को एक सीमित वेग से यात्रा करनी पड़ती है।
उन्होंने प्रकाश की गति का अनुमान ≈ 2.25 × 10⁸ m/s लगाया, जो वास्तविक मान ( m/s) के काफी करीब था।
अन्य वैज्ञानिकों के योगदान:
गैलीलियो (Galileo) ने भी प्रकाश की गति मापने की कोशिश की थी, लेकिन वे सफल नहीं हुए।
माइकेल्सन (Albert A. Michelson) ने 19वीं शताब्दी में लेजर और दर्पण प्रयोग से प्रकाश की गति को अधिक सटीक रूप से मापा।
न्यूटन (Newton) ने प्रकाश की कणिका सिद्धांत दिया, लेकिन प्रकाश की गति को लेकर कोई प्रत्यक्ष मापन नहीं किया।
अतः सही उत्तर है: (A) रोमर।
Explanation by: Indresh Gehalot
डेनमार्क के खगोलशास्त्री ओले रोमर (Ole Rømer) ने 1676 में बृहस्पति के एक उपग्रह Io के ग्रहणों का अध्ययन करते हुए पहली बार प्रकाश की गति का अनुमान लगाया।
रोमर का प्रयोग:
उन्होंने पाया कि जब पृथ्वी बृहस्पति के निकट होती है, तो Io का ग्रहण अपेक्षित समय पर होता है।
लेकिन जब पृथ्वी बृहस्पति से दूर होती है, तो Io के ग्रहणों में विलंब हो जाता है।
इस विलंब का कारण पृथ्वी और बृहस्पति के बीच की दूरी में परिवर्तन था।
रोमर ने इस आधार पर अनुमान लगाया कि प्रकाश को एक सीमित वेग से यात्रा करनी पड़ती है।
उन्होंने प्रकाश की गति का अनुमान ≈ 2.25 × 10⁸ m/s लगाया, जो वास्तविक मान ( m/s) के काफी करीब था।
अन्य वैज्ञानिकों के योगदान:
गैलीलियो (Galileo) ने भी प्रकाश की गति मापने की कोशिश की थी, लेकिन वे सफल नहीं हुए।
माइकेल्सन (Albert A. Michelson) ने 19वीं शताब्दी में लेजर और दर्पण प्रयोग से प्रकाश की गति को अधिक सटीक रूप से मापा।
न्यूटन (Newton) ने प्रकाश की कणिका सिद्धांत दिया, लेकिन प्रकाश की गति को लेकर कोई प्रत्यक्ष मापन नहीं किया।
अतः सही उत्तर है: (A) रोमर।