Explanation: भाँवर क्षेत्र उत्तर प्रदेश के तराई और गंगा के मैदानी भाग के बीच स्थित है। यह क्षेत्र शिवालिक पहाड़ियों के ठीक नीचे स्थित है और यहाँ की भूमि असमतल तथा कंकरीली होती है।
यहाँ की मृदा कंकरीली-पथरीली (Gravelly & Rocky Soil) होती है, क्योंकि यह नदियों द्वारा शिवालिक पहाड़ियों से लाई गई अपरदित सामग्री से बनी होती है।
इस क्षेत्र में जल निकासी अच्छी होती है, जिससे मृदा में नमी कम रहती है।
यहाँ मुख्य रूप से घास के मैदान और जंगल पाए जाते हैं।
यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बिजनौर, पीलीभीत, बरेली और लखीमपुर-खीरी जिलों में फैला हुआ है।
अन्य विकल्प:
महीन जलोद (B) – यह गंगा-यमुना के मैदानी भाग में पाई जाती है।
शुष्क मृदा (C) – यह बुंदेलखंड और दक्षिणी भागों में अधिक पाई जाती है।
दलदली (D) – यह तराई क्षेत्र में पाई जाती है, भावर में नहीं।
Explanation by: Indresh Gehalot
यहाँ की मृदा कंकरीली-पथरीली (Gravelly & Rocky Soil) होती है, क्योंकि यह नदियों द्वारा शिवालिक पहाड़ियों से लाई गई अपरदित सामग्री से बनी होती है।
इस क्षेत्र में जल निकासी अच्छी होती है, जिससे मृदा में नमी कम रहती है।
यहाँ मुख्य रूप से घास के मैदान और जंगल पाए जाते हैं।
यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बिजनौर, पीलीभीत, बरेली और लखीमपुर-खीरी जिलों में फैला हुआ है।
अन्य विकल्प:
महीन जलोद (B) – यह गंगा-यमुना के मैदानी भाग में पाई जाती है।
शुष्क मृदा (C) – यह बुंदेलखंड और दक्षिणी भागों में अधिक पाई जाती है।
दलदली (D) – यह तराई क्षेत्र में पाई जाती है, भावर में नहीं।