Q. हिंदुस्तानी मुखर संगीत की रचना का सबसे पुराना रूप है?

  • (A) धुर्पद
  • (B) ठुमरी
  • (C) ग़ज़ल
  • (D) कोई भी विकल्प नहीं
✅ Correct Answer: (A) धुर्पद

Explanation: ध्रुपद हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का सबसे पुराना मुखर संगीत रूप है।

यह संस्कृत ग्रंथों और भक्ति संगीत से विकसित हुआ।

इसकी जड़ें संस्कृत के प्राचीन "चंद" और "प्रबंध" गीतों में मिलती हैं।

ध्रुपद की शैली गंभीर, स्थिर और ध्यानपूर्ण होती है।

इसे धमार, सदरा, और चौताल जैसी तालों में गाया जाता है।

प्रसिद्ध ध्रुपद गायक: उस्ताद जाकिरुद्दीन, उस्ताद नसीरुद्दीन डागर, और गुथेले ग्वालियर घराना।


अन्य विकल्प:

ठुमरी (B) – एक भावनात्मक और हल्की शास्त्रीय शैली है, जो बाद में विकसित हुई।

ग़ज़ल (C) – यह फ़ारसी और उर्दू साहित्य का काव्य रूप है, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का मूल रूप नहीं।

कोई भी विकल्प नहीं (D) – गलत, क्योंकि ध्रुपद सबसे पुराना मुखर संगीत रूप है।

Explanation by: Mr. Dubey
ध्रुपद हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का सबसे पुराना मुखर संगीत रूप है।

यह संस्कृत ग्रंथों और भक्ति संगीत से विकसित हुआ।

इसकी जड़ें संस्कृत के प्राचीन "चंद" और "प्रबंध" गीतों में मिलती हैं।

ध्रुपद की शैली गंभीर, स्थिर और ध्यानपूर्ण होती है।

इसे धमार, सदरा, और चौताल जैसी तालों में गाया जाता है।

प्रसिद्ध ध्रुपद गायक: उस्ताद जाकिरुद्दीन, उस्ताद नसीरुद्दीन डागर, और गुथेले ग्वालियर घराना।


अन्य विकल्प:

ठुमरी (B) – एक भावनात्मक और हल्की शास्त्रीय शैली है, जो बाद में विकसित हुई।

ग़ज़ल (C) – यह फ़ारसी और उर्दू साहित्य का काव्य रूप है, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का मूल रूप नहीं।

कोई भी विकल्प नहीं (D) – गलत, क्योंकि ध्रुपद सबसे पुराना मुखर संगीत रूप है।

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