Explanation:
भारत में दशमिक मुद्रा प्रणाली 1 अप्रैल 1958 को रघुनाथ राव (Raghunath Rao) द्वारा लागू की गई थी।
इस प्रणाली के अंतर्गत भारत में रूपये का विभाजन दशमलव के आधार पर हुआ था, जिसमें 1 रुपया = 100 पैसे की जगह अब 1 रुपया = 100 पैसे में नहीं बल्कि दसवीं संख्या में परिभाषित किया गया। यह प्रणाली समीक्षा और गणना की सरलता के लिए लागू की गई थी।
इससे पहले भारत में विभिन्न मुद्राओं के भिन्न मानक थे, जिससे व्यापार और लेन-देन में समस्या उत्पन्न हो रही थी। दशमिक प्रणाली ने भारतीय मुद्रा की पहचान को विश्वस्तरीय बना दिया और इसने व्यापार और आर्थिक लेन-देन को सुविधाजनक बना दिया।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(A) 1956:
इस वर्ष दशमिक मुद्रा प्रणाली लागू नहीं की गई थी, बल्कि यह कुछ अन्य आर्थिक सुधारों के लिए महत्वपूर्ण था।
(C) 1955:
इस वर्ष भी दशमिक मुद्रा प्रणाली लागू नहीं हुई थी।
(D) 1957:
यह भी सही नहीं है, क्योंकि 1958 में दशमिक प्रणाली लागू की गई थी।
निष्कर्ष:
भारत ने दशमिक मुद्रा प्रणाली 1 अप्रैल 1958 से शुरू की थी।
Explanation by: Mr. Dubey
भारत में दशमिक मुद्रा प्रणाली 1 अप्रैल 1958 को रघुनाथ राव (Raghunath Rao) द्वारा लागू की गई थी।
इस प्रणाली के अंतर्गत भारत में रूपये का विभाजन दशमलव के आधार पर हुआ था, जिसमें 1 रुपया = 100 पैसे की जगह अब 1 रुपया = 100 पैसे में नहीं बल्कि दसवीं संख्या में परिभाषित किया गया। यह प्रणाली समीक्षा और गणना की सरलता के लिए लागू की गई थी।
इससे पहले भारत में विभिन्न मुद्राओं के भिन्न मानक थे, जिससे व्यापार और लेन-देन में समस्या उत्पन्न हो रही थी। दशमिक प्रणाली ने भारतीय मुद्रा की पहचान को विश्वस्तरीय बना दिया और इसने व्यापार और आर्थिक लेन-देन को सुविधाजनक बना दिया।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(A) 1956:
इस वर्ष दशमिक मुद्रा प्रणाली लागू नहीं की गई थी, बल्कि यह कुछ अन्य आर्थिक सुधारों के लिए महत्वपूर्ण था।
(C) 1955:
इस वर्ष भी दशमिक मुद्रा प्रणाली लागू नहीं हुई थी।
(D) 1957:
यह भी सही नहीं है, क्योंकि 1958 में दशमिक प्रणाली लागू की गई थी।
निष्कर्ष:
भारत ने दशमिक मुद्रा प्रणाली 1 अप्रैल 1958 से शुरू की थी।