Explanation:
गोलकुंडा राज्य ने अंग्रेजों को मुक्त व्यापार के लिए सुनहरा फरमान (Golden Firman) जारी किया था।
यह फरमान कुतुब शाह वंश के शासक अब्दुल्ला कुतुब शाह द्वारा 1616 में जारी किया गया था।
इस फरमान के अंतर्गत अंग्रेजों को गोलकुंडा राज्य में व्यापार करने की स्वतंत्रता दी गई थी। इससे अंग्रेजों को भारतीय उपमहाद्वीप में व्यापार में महत्वपूर्ण लाभ मिला और उनके व्यापारिक हितों को बढ़ावा मिला।
इसी कारण, अंग्रेजों को भारत में अपनी स्थिति को मजबूत करने का अवसर मिला, जिससे बाद में उन्होंने भारत पर साम्राज्यवादी नियंत्रण स्थापित किया।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(A) हैदराबाद:
हैदराबाद राज्य ने अंग्रेजों के साथ बहुत बाद में व्यापारिक समझौते किए, लेकिन गोलकुंडा के शासक ने पहले ही मुक्त व्यापार का फरमान जारी किया था।
(B) बीजापुर:
बीजापुर राज्य ने अंग्रेजों के साथ समझौते तो किए थे, लेकिन गोलकुंडा की तरह व्यापार के लिए विशेष "सुनहरा फरमान" नहीं दिया था।
(D) अहमदनगर:
अहमदनगर भी एक महत्वपूर्ण राज्य था, लेकिन उसने अंग्रेजों के लिए ऐसा कोई विशेष फरमान जारी नहीं किया।
निष्कर्ष:
गोलकुंडा राज्य ने अंग्रेजों को मुक्त व्यापार के लिए सुनहरा फरमान जारी किया था।
Explanation by: Mr. Dubey
गोलकुंडा राज्य ने अंग्रेजों को मुक्त व्यापार के लिए सुनहरा फरमान (Golden Firman) जारी किया था।
यह फरमान कुतुब शाह वंश के शासक अब्दुल्ला कुतुब शाह द्वारा 1616 में जारी किया गया था।
इस फरमान के अंतर्गत अंग्रेजों को गोलकुंडा राज्य में व्यापार करने की स्वतंत्रता दी गई थी। इससे अंग्रेजों को भारतीय उपमहाद्वीप में व्यापार में महत्वपूर्ण लाभ मिला और उनके व्यापारिक हितों को बढ़ावा मिला।
इसी कारण, अंग्रेजों को भारत में अपनी स्थिति को मजबूत करने का अवसर मिला, जिससे बाद में उन्होंने भारत पर साम्राज्यवादी नियंत्रण स्थापित किया।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
(A) हैदराबाद:
हैदराबाद राज्य ने अंग्रेजों के साथ बहुत बाद में व्यापारिक समझौते किए, लेकिन गोलकुंडा के शासक ने पहले ही मुक्त व्यापार का फरमान जारी किया था।
(B) बीजापुर:
बीजापुर राज्य ने अंग्रेजों के साथ समझौते तो किए थे, लेकिन गोलकुंडा की तरह व्यापार के लिए विशेष "सुनहरा फरमान" नहीं दिया था।
(D) अहमदनगर:
अहमदनगर भी एक महत्वपूर्ण राज्य था, लेकिन उसने अंग्रेजों के लिए ऐसा कोई विशेष फरमान जारी नहीं किया।
निष्कर्ष:
गोलकुंडा राज्य ने अंग्रेजों को मुक्त व्यापार के लिए सुनहरा फरमान जारी किया था।