Q. किस संत ने ईश्वर को अपने पास अनुभव करने के लिए नृत्य एवं गीतों (कीर्तन) को माध्यम बनाया?
✅ Correct Answer: (D)
चैतन्य महाप्रभु
Explanation:
चैतन्य महाप्रभु (1486-1534) भक्ति आंदोलन के महान संत थे।
- उन्होंने हरि-नाम संकीर्तन (भगवान के नाम का सामूहिक कीर्तन) को भक्ति का सर्वोच्च साधन माना।
- वे वैष्णव भक्ति संप्रदाय के प्रमुख प्रचारक थे और उन्होंने कृष्ण भक्ति पर विशेष जोर दिया।
- उन्होंने नृत्य और गीतों (कीर्तन) के माध्यम से ईश्वर की अनुभूति करने की परंपरा को बढ़ावा दिया।
- वे बंगाल, उड़ीसा और वृंदावन में कृष्ण भक्ति का प्रचार करते रहे।
- उन्हें श्रीकृष्ण का अवतार भी माना जाता है और उनके अनुयायी उन्हें गौरांग महाप्रभु भी कहते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- (A) चंडीदास – बंगाल के प्रसिद्ध वैष्णव कवि थे, लेकिन उन्होंने नृत्य और संकीर्तन को प्रमुख रूप से अपनाया, इसका उल्लेख नहीं मिलता।
- (B) ज्ञानदेव – महाराष्ट्र के संत थे और उन्होंने भगवद्गीता पर प्रसिद्ध ग्रंथ ज्ञानेश्वरी लिखा, लेकिन उनका प्रमुख साधन कीर्तन नहीं था।
- (C) शंकरदेव – असम में भक्ति आंदोलन के प्रचारक थे और उन्होंने संकीर्तन पर जोर दिया, लेकिन कीर्तन और नृत्य को एक आंदोलन के रूप में स्थापित करने का श्रेय चैतन्य महाप्रभु को जाता है।
निष्कर्ष:
ईश्वर को अनुभव करने के लिए नृत्य एवं गीत (कीर्तन) को माध्यम बनाने वाले संत चैतन्य महाप्रभु थे।
इसलिए सही उत्तर (D) चैतन्य महाप्रभु है।
Explanation by: Official MCQ Buddy
चैतन्य महाप्रभु (1486-1534) भक्ति आंदोलन के महान संत थे।
- उन्होंने हरि-नाम संकीर्तन (भगवान के नाम का सामूहिक कीर्तन) को भक्ति का सर्वोच्च साधन माना।
- वे वैष्णव भक्ति संप्रदाय के प्रमुख प्रचारक थे और उन्होंने कृष्ण भक्ति पर विशेष जोर दिया।
- उन्होंने नृत्य और गीतों (कीर्तन) के माध्यम से ईश्वर की अनुभूति करने की परंपरा को बढ़ावा दिया।
- वे बंगाल, उड़ीसा और वृंदावन में कृष्ण भक्ति का प्रचार करते रहे।
- उन्हें श्रीकृष्ण का अवतार भी माना जाता है और उनके अनुयायी उन्हें गौरांग महाप्रभु भी कहते हैं।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- (A) चंडीदास – बंगाल के प्रसिद्ध वैष्णव कवि थे, लेकिन उन्होंने नृत्य और संकीर्तन को प्रमुख रूप से अपनाया, इसका उल्लेख नहीं मिलता।
- (B) ज्ञानदेव – महाराष्ट्र के संत थे और उन्होंने भगवद्गीता पर प्रसिद्ध ग्रंथ ज्ञानेश्वरी लिखा, लेकिन उनका प्रमुख साधन कीर्तन नहीं था।
- (C) शंकरदेव – असम में भक्ति आंदोलन के प्रचारक थे और उन्होंने संकीर्तन पर जोर दिया, लेकिन कीर्तन और नृत्य को एक आंदोलन के रूप में स्थापित करने का श्रेय चैतन्य महाप्रभु को जाता है।
निष्कर्ष:
ईश्वर को अनुभव करने के लिए नृत्य एवं गीत (कीर्तन) को माध्यम बनाने वाले संत चैतन्य महाप्रभु थे।
इसलिए सही उत्तर (D) चैतन्य महाप्रभु है।