इस अलंकार में किसी व्यंजन वर्ण की आवृत्ति होती है। आवृत्ति का अर्थ है दोहराना। जैसे- ‘‘तरनि-तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।’’ उपयुक्त उदाहरणों में ‘त’ वर्ण की लगातार आवृत्ति है, इस कारण से इसमें अनुप्रास अलंकार की छटा है। अनुप्रास अलंकार के उदाहरण: # प्रसाद के काव्य कानन की काकली कहकहे लगाती नजर आती है। # चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल थल में। # मुदित महीपति मंदिर आए। सेवक सचिव सुमंत बुलाए। # बंदऊँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा ।