Explanation: 37 वें संविधान संशोधन 1975 के द्वारा अनुच्छेद 239-ए और 240 में संशोधन किया गया जिसके तहत अरुणाचल प्रदेश को केन्द्र शासित प्रदेश घोषित किया गया और इसके लिए विधान सभा तथा मंत्रिपरिषद् के गठन की व्यवस्था की गई।
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Explanation: 37 वें संविधान संशोधन 1975 के द्वारा अनुच्छेद 239-ए और 240 में संशोधन किया गया जिसके तहत अरुणाचल प्रदेश को केन्द्र शासित प्रदेश घोषित किया गया और इसके लिए विधान सभा तथा मंत्रिपरिषद् के गठन की व्यवस्था की गई।
Explanation: वह सदन राज्यसभा है। राज्यसभा का अध्यक्ष, जिसे सभापति कहा जाता है, भारत का उपराष्ट्रपति होता है। भारतीय संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदस्य नहीं होता है, लेकिन वह पदेन सभापति के रूप में सदन की अध्यक्षता करता है।
यहां राज्यसभा के अध्यक्ष के बारे में कुछ अतिरिक्त जानकारी दी गई है:
-- चुनाव: भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा किया जाता है।
-- कार्यकाल: उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
-- भूमिका: राज्यसभा के सभापति के रूप में, उपराष्ट्रपति सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता करता है, सदन में व्यवस्था बनाए रखता है, और सदस्यों के अधिकारों और विशेषाधिकारों की रक्षा करता है।
-- निर्णायक मत: यदि किसी मुद्दे पर राज्यसभा में मत बराबर हो जाते हैं, तो सभापति निर्णायक मत डाल सकता है।
Explanation:
हड़प्पा सभ्यता से जुड़े विभिन्न पुरातात्विक प्रमाणों के आधार पर हम प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करते हैं:
(A) उन्हें अश्वमेघ की जानकारी थी (❌ गलत)
(B) गाय उनके लिए पवित्र थी (❌ गलत)
(C) उन्होंने पशुपति का सम्मान करना आरंभ किया (✅ सही)
(D) उनकी संस्कृति सामान्यतः स्थिर नहीं थी (❌ गलत)
इसलिए, सही उत्तर है:
(C) उन्होंने पशुपति का सम्मान करना आरंभ किया
Explanation:
सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) के घर मुख्य रूप से पकी हुई ईंटों से बनाए जाते थे।
कारण:
पकी हुई ईंटों का उपयोग:
मजबूत और टिकाऊ संरचनाएँ:
अन्य सामग्रियाँ कम उपयोग में थीं:
इसलिए, सही उत्तर है:
(A) ईंट
Explanation:
आबू का जैन मंदिर, जिसे देलवाड़ा जैन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान के माउंट आबू में स्थित है। यह मंदिर जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यधिक पवित्र स्थल है और इसकी वास्तुकला एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करती है।
संगमरमर का उपयोग: इस मंदिर की प्रमुख विशेषता इसका निर्माण संगमरमर से हुआ है। संगमरमर एक प्राकृत, सफेद और चमकदार पत्थर होता है, जिसे भारतीय स्थापत्य कला में बहुत लोकप्रियता प्राप्त है। संगमरमर का उपयोग मंदिरों के निर्माण में वास्तुकला को और अधिक भव्य और सुंदर बनाने के लिए किया जाता है।
वास्तुकला: देलवाड़ा जैन मंदिर की वास्तुकला अत्यंत विस्तृत और जटिल है, जिसमें हर दीवार, छत और स्तंभ पर सुंदर नक्काशी की गई है। यह मंदिर दो प्रमुख भागों में बंटा हुआ है: 1) मुख्य मंदिर और 2) अन्य सहायक संरचनाएँ।
मंदिर के हर हिस्से में सजीव नक्काशी, मंदिर के शिल्पकला के ऊंचे मानक को दर्शाती है। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर भगवान रिषभदेव, महावीर स्वामी और अन्य जैन तीर्थंकरों की मूर्तियाँ उकेरी गई हैं। संगमरमर की सफेदी और शिल्पकारी की भव्यता इस मंदिर को एक आदर्श वास्तुकला का उदाहरण बनाती है।
संगमरमर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व: संगमरमर, विशेष रूप से भारत में, धार्मिक स्थल बनाने के लिए एक पवित्र और शुद्ध सामग्री मानी जाती है। यह पत्थर न केवल मजबूत होता है बल्कि इसका रंग और चमक भी आध्यात्मिक वातावरण को संतुलित करने में मदद करते हैं।
इसलिए, आबू का जैन मंदिर संगमरमर से बना है, जो उसकी अद्वितीय सुंदरता और वास्तुकला का प्रमुख कारण है।
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