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ऋग्वेद और आर्यों के बारे में विस्तृत जानकारी


# भारत आगमन के क्रम में आर्य मध्य एशिया और ईरान पहुंचे।

# भारत में आर्यों की जानकारी ऋग्वेद से मिलती है।

# ऋग्वेद हिंदी यूरोपीय भाषाओं का सबसे प्राचीनतम और पवित्र ग्रंथ है। ऋग्वेद में अग्नि, इंद्र, मित्र, वरुण आदि देवताओं की स्तुतियां संग्रहीत हैं जिनकी रचना विभिन्न गोत्रों के ऋषियों और मंत्र स्रष्टाओं ने की है। 

# इसमें 10 बंडल या भाग हैं जिनमें मंडल 2 से 7 तक प्राचीनतम अंश है। प्रथम और दशम मंडल सबसे अंत में जोड़े गए हैं।

# ऋग्वेद के मंत्रों का पाठ करने वाला पुरोहित होत्र कहलाता था। 

# चौथे मंडल के तीन मंत्रों की रचना 3 राजाओं ने की है त्रासदस्यु, अजमीड़ तथा पुरमीड। नोवा मंडल सोम को समर्पित है अतः इसे सोममंडल कहा गया है। 

# दसवां मंडल सबसे अंत में जोड़ा गया है अतः इसी के एक भाग, पुरुष सूक्त में चतुर वर्ण व्यवस्था की स्थापना की सूचना मिलती है। इसी मंडल में देवी सूक्त का उल्लेख है जिसमें वाक शक्ति की उपासना की गई है। 

# ऋग्वेद के ब्राह्मण ग्रंथ स्तरीय व कोशिश की है। आयुर्वेद को ऋग्वेद का उपवेद कहा जाता है। ऋग्वेद की सर्वाधिक पवित्र नदी सरस्वती थी। इसे नदीतमा (नदियों में सर्वश्रेष्ठ ) कहा गया है। 

# ऋग्वेद में यमुना का उल्लेख तीन बार एवं गंगा का उल्लेख एक बार (10 वें मंडल में) मिलता है। असतो मा सदगमय वाक्य ऋग्वेद से लिया गया है। 

# इराक में मिले लगभग 16 ई सा पूर्व के कस्साइट अभिलेखों में तथा सीरिया में मितन्नी अभिलेखों में आर्य नामों का उल्लेख मिलता है। 

# भारत में आर्य भाषा भाषियों का आगमन 1500 ईसा पूर्व से कुछ समय पूर्व हुआ। 

# आर्य शब्द से एक जाति विशेष को समझा जाता है । आरंभिक भारतीय विद्वानों ने इस शब्द का यही अर्थ लगाया है। आर्यों को भारतीय सभ्यता व संस्कृति का संस्थापक माना गया है। 

# आर्य शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ उत्तम, श्रेष्ठ व्यक्ति या उच्च कुल में उत्पन्न माना जाता है। 

# आरंभिक आर्यों का निवास पूर्वी अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के पंजाब तथा हरियाणा से था। 

# ऋग्वेद में अफगानिस्तान की कुर्रम व कुभा आदि कुछ नदियों तथा सिंधु और उसकी 5 सहायक नदियों का उल्लेख है। 

# सिंधु आर्यों की सबसे प्रमुख नदी है जिसका उन्होंने बार-बार उल्लेख किया है

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