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अमेरिकी क्रांति (1776 ई.) का प्रभाव

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अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध की वास्तविक महत्ता न तो स्पेन या फ्रांस के प्रादेशिक लाभों, न हॉलैण्ड की व्यापारिक क्षतियों तथा इंग्लैण्ड के साम्राज्य की अवनति में ही थी, वरन् इसकी वास्तविक महत्ता अमेरिकी क्रांति के सफल संपादन में पायी जाती है। इसने दैवी अधिकार पर आधारित राजतंत्र तथा कुलीनतंत्रीय एकाधिकार पर घातक प्रहार किया। 
अमेरिकी स्वतंत्रता के युद्ध द्वारा इंग्लैण्ड में ‘रक्तहीन राज्यक्रांति’ द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत का और अधिक विकास हुआ। इसने संसद, प्रतिनिधि संस्था, जनता की प्रभुसत्ता व जनतंत्र की प्रतिष्ठा स्थापित की, अर्थात् इसने ब्रिटिश जनंतत्र की नींव डाली। 
इस युद्ध का फ्रासं पर भयानक प्रभाव पड़ा। जिन फ्रासीसी सैनिकों ने इस युद्ध में भाग लिया था, वे अमेरिकी रहन-सहन व शासन पद्धति से बड़े प्रभावित हुए। अत: स्वदेश लौटने पर उन्होंने फ्रांस में अमेरिकी संस्थाओं जैसी व्यवस्थाओं की माँग की। इसके फलस्वरूप 1789 ई. में फ्रासीसी राज्य क्रांति का प्रारंभ हुआ। इस युद्ध के कारण फ्रांस की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गयी। इस आर्थिक स्थिति के कारण ही फ्रांस का दिवाला निकल गया और राज्य क्रांति का विस्फोट हुआ। 
इस युद्ध के परिणामस्वरूप एग्लो- सैक्सन साम्राज्य के दो टुकड़े हो गये जिसके फलस्वरूप इंग्लैण्ड तथा अमेरिका के बीच मनमुटाव उत्पन्न हो गया। यह मनमुटाव काफी समय तक चलता रहा। 
यूरोप की राजनीति पर अमेरिकी युद्ध का बड़ा महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा। अमेरिकी लोगों के हृदय में स्वतंत्रता की जो ज्योति जागतृ हइुर् ओर उन्होने जिस प्रकार इंग्लैण्ड से स्वतंत्र होकर एक प्रजातंत्र की स्थापना कर ली, इसका फ्रांसीसियों के विचारों और कल्पना पर गहरा प्रभाव पड़ा। अत: फ्रांसीसियों ने भी एक प्रजातंत्र की कल्पना कर डाली और फलस्वरूप शीघ्र ही फ्रांस में राज्यक्रांति आरंभ हुई। 
आयरलैण्ड पर भी अमेरिकी युद्ध की सफलता का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा। अमेरिका में अपनी पराजय से ब्रिटिश सरकार भयभीत हो गयी थी, अत: उसने आयरिश जनता की माँग पूरी कर दी। इस प्रकार 1800 ई. में यंगर पिट ने एक्ट ऑफ यूनियन पास कर ब्रिटिश संसद के साथ आयरिश संसद को मिला दिया और इस प्रकार आयरलैण्ड की समस्या का समाधान हो गया। 
अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध के कारण ब्रिटिश साम्राज्य के विभिन्न भागों में अनेक प्रशासकीय तथा वैधानिक सुधार किये गये। भारतवर्ष में स्थित ईस्ट इण्डिया कंपनी के कायोर्ं पर विभिन्न प्रकार के नियंत्रण रखे गये, जिससे कहीं भारतवर्ष भी अमेरिका की भाँति स्वतंत्रता न प्राप्त कर ले। 
अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध के परिणामस्वरूप ही ब्रिटिश सरकार को कई आर्थिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ा।

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