जब उपमेय पर उपमान का निषेध-रहित आरोप करते है, तब रूपक अलंकार होता है | उपमेय में उपमान के आरोप का अर्थ है – दोनों में अभिन्नता या अभेद दिखाना | इस आरोप में निषेध नहीं होता है | जैसे – “यह जीवन क्या है ? निर्झर है |” रूपक अलंकार के उदाहरण : मैया ! मैं तो चन्द्र खिलौना लैहों | चरण-कमल बंदौ हरिराई | राम कृपा भव-निसा सिरानी | प्रेम-सलिल से द्वेष का सारा मल धुल जाएगा |