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महादेशीय ढलान (CONTINENTAL SLOPE)

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Continental Slope पर ही हमें महासागर की सीधी गहराई का भान होता है. यह भाग महादेशीय निधाय (continental shelves) के बाद का है जिसकी गहराई 600 ft से 12,000 ft तक हुआ करती है. अथाह समुद्र के रहस्य और प्रतिकूल गुण का अनुभव इसी भाग से होना शुरू होता है जहाँ बढ़ता हुआ दबाव और अंधेरा समस्त वनस्पति-जीवन को ऊपर ही छोड़ देता है. इस बाग़ की दुनिया ऐसे जंतुओं की दुनिया है जहाँ एक प्राणी दूसरे आक्रमण कर उसका भक्षण कर जाता है.

महादेशीय ढलान (continental slope) महादेशों की सुदूरतम सीमाएँ हैं. इसी के बाद वास्तविक महासागर शुरू होता है जिसे अगाध समुद्र का प्रदेश कहा जाता है. महादेशीय ढलानों (continental slope) का अध्ययन करने में वैज्ञानिक लगे हुए हैं. इस भाग में नदी-घाटी जैसी कटानों के अनेक चिह्न या सागरमग्न संकीर्ण गहन घाटियाँ (undersea narrow deep valleys) Submarine Canyons) मिली हैं, जिनकी उत्पत्ति के सम्बन्ध में भिन्न-भिन्न मत इकट्ठे हो रहे हैं. महादेशीय ढलानों (continental slopes) का क्षेत्रफल लगभग 3 करोड़ वर्गमील होगा.

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