You are here: Home / Hindi Web /Topics / गाँधी-इरविन पैक्ट/GANDHI-IRWIN PACT

गाँधी-इरविन पैक्ट/GANDHI-IRWIN PACT

Filed under: History on 2021-08-06 15:57:43
जैसे ही गाँधीजी जेल से बाहर आये उन्होंने वायसराय लॉर्ड इरविन से मिलने की इच्छा जताई. कई दिनों तक वे दोनों मिलते रहे और अंत में एक समझौते के रूप में बात समाप्त हुई. उसका नाम पड़ा “गांधी-इरविन पैक्ट/Gandhi-Irwin Pact“.

26 जनवरी, 1931 ई. को गाँधी-इरविन समझौता हुआ जिसके अनुसार तय हुआ कि जब सत्याग्रह बंद कर दिया जायेगा और सभी राजनैतिक कैदी छोड़ दिए जायेंगे तब कांग्रेस गोलमेज सम्मलेन में भाग लेगी. द्वितीय गोलमेज सम्मलेन में भाग लेने के लिए कांग्रेस के एक मात्र प्रतिनिधि के रूप में गाँधीजी लन्दन गए. वहाँ उन्होंने भारत के लिए पूर्ण स्वतंत्रता की माँग की जिसे ब्रिटिश सरकार के द्वारा स्वीकार नहीं किया गया और गाँधीजी विक्षुब्ध होकर भारत लौटे. भारत लौटकर गाँधीजी ने देखा कि सरकार तो दमन करने पर तुली हुई है.

यहाँ आकर उन्होंने अपने सविनय अवज्ञा आन्दोलन को और तेज कर दिया. सरकार ने गाँधीजी को गिरफ्तार कर लिया. सरकार की कठोर दमन नीति के बावजूद आन्दोलन चलता रहा. सरकार ने हिन्दू और मुसलमानों के बीच तो फूट डाला ही साथ ही अछूतों को भी हिन्दुओं के विरुद्ध भड़काने का प्रयास किया. 8 मई, 1933 को गाँधीजी ने जेल से मुक्त होकर छ: सप्ताह के लिए सविनय अवज्ञा आन्दोलन बंद कर व्यक्तिगत सत्याग्रह प्रारम्भ किया. कांग्रेस के नेता रचनात्मक कार्यों में लग गए, आन्दोलन बंद नहीं हुआ, लेकिन उसकी गति धीमी पड़ गई. मई 1934 ई. में कांग्रेस की कार्यकारिणी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन और सत्याग्रह बंद करने की घोषणा की. सविनय अवज्ञा आन्दोलन को बिना शर्त स्थगित करने की नीति से कांग्रेस की युवा पीढ़ी गाँधीजी से अत्यंत रुष्ट हो गई. फिर भी इस आन्दोलन से भारतीय जनता में एक नए उत्साह का संचार हुआ तथा कांग्रेस एक जनप्रिय संस्था बन कर उभरी.
About Author:
M
Madhu     View Profile
Trust everyone but don't trust blindly
More History Topics

हररप्पा सभ्यता में लोगों की अर्थव्यवस्था People’s economy in Harappan civilization


पानीपत का द्वितीय युद्ध | Second battle of Panipat


गदर पार्टी के बारे में जानें – GADAR PARTY in hindi


चोल साम्राज्य का अंत किसने किया था | चोल साम्राज्य का पतन किसने किया


तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817 ई. से 1818 ई.)


डांडी मार्च Important Points in Hindi


प्रथम विश्व युद्ध का परिणाम


पाटलीपुत्र नगर की स्थापना किसने की थी | पटना का इतिहास


द्वितीय विश्वयुद्ध, कारण, परिणाम


पानीपत का तृतीय युद्ध | Third battle of Panipat


सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारण | Causes of Civil Disobedience movement in hindi


प्लासी का युद्ध विस्तार में


हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख विशेषता और कला Key Features and Art


मगध पर विजय और मौर्य साम्राज्य की नींव ( 321 ई.पू.)


1857 विद्रोह के कारण