📊 Science
Q. पैट्रोल में लगी आग को पानी से नहीं बुझाया जा सकता है –
  • (A) अत्याधिक ऊष्मा के कारण पानी विघटित हो जाता है।
  • (B) पैट्रोल पानी पर तैरने लगता है।
  • (C) पैट्रोल और पानी दोनों द्रव है।
  • (D) इनमें से कोई नहीं
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✅ Correct Answer: (B) पैट्रोल पानी पर तैरने लगता है।

Explanation: पेट्रोल में लगी आग को पानी से नहीं बुझाया जा सकता क्योंकि:

1. पेट्रोल का घनत्व पानी से कम होता है

पेट्रोल पानी से हल्का होता है, इसलिए जब पानी डाला जाता है, तो यह पेट्रोल के नीचे चला जाता है और पेट्रोल ऊपर तैरने लगता है।

इससे आग और फैल सकती है।



2. पानी ज्वलनशील पदार्थों को ठंडा करने के लिए उपयुक्त नहीं है

पेट्रोल एक अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ है, और इसे बुझाने के लिए पानी की बजाय फोम, कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) या रेत का उपयोग किया जाता है।

फोम या CO₂ ऑक्सिजन की आपूर्ति रोक देते हैं, जिससे आग बुझ जाती है।





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अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?

❌ (A) अत्यधिक ऊष्मा के कारण पानी विघटित हो जाता है:

पानी बहुत अधिक तापमान पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में नहीं टूटता, बल्कि भाप बन जाता है। लेकिन यह मुख्य कारण नहीं है।


❌ (C) पेट्रोल और पानी दोनों द्रव हैं:

यह सही है कि दोनों द्रव हैं, लेकिन आग बुझाने की असमर्थता का कारण यह नहीं है।


❌ (D) इनमें से कोई नहीं:

सही उत्तर (B) पेट्रोल पानी पर तैरने लगता है।



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निष्कर्ष:

पेट्रोल में लगी आग को पानी से बुझाने पर पेट्रोल पानी पर तैरने लगता है और आग और फैल सकती है। इसलिए इसे बुझाने के लिए फोम या CO₂ अग्निशामक का उपयोग किया जाता है।

✅ सही उत्तर: (B) पेट्रोल पानी पर तैरने लगता है।

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Q. निम्न में से किसकी भेदन क्षमता अधिक है –
  • (A) α किरण
  • (B) β किरण
  • (C) γ किरण
  • (D) तीनों की समान
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✅ Correct Answer: (C) γ किरण

Explanation: तीनों किरणों की भेदन क्षमता (Penetrating Power) अलग-अलग होती है:

1. α (अल्फा) किरणें:

ये हेलियम नाभिक (₂He⁴) के समान भारी कण होते हैं।

इनकी भेदन क्षमता सबसे कम होती है।

कागज की शीट या त्वचा भी इन्हें रोक सकती है।



2. β (बीटा) किरणें:

ये तेज़ गति से चलने वाले इलेक्ट्रॉन या पोजीट्रॉन होते हैं।

इनकी भेदन क्षमता α किरणों से अधिक होती है, लेकिन γ किरणों से कम।

धातु की पतली शीट (जैसे एल्यूमीनियम) इन्हें रोक सकती है।



3. γ (गामा) किरणें:

ये ऊर्जा युक्त विद्युत चुम्बकीय तरंगें होती हैं।

इनकी भेदन क्षमता सबसे अधिक होती है।

सीसा (Lead) या मोटी कंक्रीट की दीवार ही इन्हें रोक सकती है।





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निष्कर्ष:

गामा किरणें (γ किरणें) सबसे अधिक भेदन क्षमता वाली होती हैं, इसलिए इनसे बचाव के लिए विशेष सुरक्षात्मक परतों की आवश्यकता होती है।

✅ सही उत्तर: (C) γ किरण

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Q. एक समान गति करते हुए आवेश द्वारा उत्पन्न होता है –
  • (A) केवल वैधुत क्षेत्र
  • (B) केवल चुम्बकीय क्षेत्र
  • (C) वैधुत एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों
  • (D) इनमें से कोई नहीं।
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✅ Correct Answer: (C) वैधुत एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों

Explanation: जब कोई आवेश (Charge) एकसमान गति (Uniform Motion) करता है, तो यह दोनों प्रकार के क्षेत्रों को उत्पन्न करता है:

1. वैद्युत क्षेत्र (Electric Field, )

स्थिर (Rest) या गति कर रहा कोई भी आवेश हमेशा एक वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है।

यह क्षेत्र आवेश के चारों ओर मौजूद रहता है।



2. चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field, )

जब कोई आवेश गति करता है, तो इसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।

यह एम्पियर के परिकल्पना (Ampere’s Hypothesis) और बायोट-सावर्ट नियम (Biot-Savart Law) के अनुसार होता है।




विशेष स्थिति:

यदि आवेश स्थिर होता (At Rest), तो केवल वैद्युत क्षेत्र बनता।

यदि आवेश त्वरित गति करता, तो यह विद्युत चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic Waves) उत्पन्न करता।



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अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?

❌ (A) केवल वैद्युत क्षेत्र:

गति कर रहा आवेश चुंबकीय क्षेत्र भी उत्पन्न करता है, इसलिए यह उत्तर गलत है।


❌ (B) केवल चुंबकीय क्षेत्र:

कोई भी आवेश हमेशा एक वैद्युत क्षेत्र रखता है, इसलिए यह उत्तर भी गलत है।


❌ (D) इनमें से कोई नहीं:

सही उत्तर (C) वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों पहले ही दिया गया है।



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निष्कर्ष:

गति कर रहा कोई भी आवेश वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों उत्पन्न करता है।

✅ सही उत्तर: (C) वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों

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Q. 50 वाट के 10 बल्बों के एक माह (30) तक प्रतिदिन 10 घंटा जलाने से कितने किलोवाट घण्टा विद्युत ऊर्जा की खपत होती है
  • (A) 1500
  • (B) 15000
  • (C) 15
  • (D) 150
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✅ Correct Answer: (D) 150
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Q. बढ़ती आवृति क्रम में तरंगों का सही क्रम है –
  • (A) अवरक्त, UV, x – किरणें, गामा किरणें
  • (B) रेडियो तरंगे, कॉस्मिक तरंग UV, IR, गामा किरणें
  • (C) x – किरणें, रेडियो तरंग, कॉस्मिक तरंग, UV, गामा किरणें
  • (D) गामा, UV, IR, रेडियो तरंग
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✅ Correct Answer: (A) अवरक्त, UV, x – किरणें, गामा किरणें

Explanation: विद्युत चुंबकीय तरंगों (Electromagnetic Waves) को आवृत्ति (Frequency) के बढ़ते क्रम में इस प्रकार रखा जाता है:

1️⃣ रेडियो तरंगें (Radio Waves) → सबसे कम आवृत्ति
2️⃣ माइक्रोवेव (Microwaves)
3️⃣ अवरक्त किरणें (Infrared - IR)
4️⃣ दृश्य प्रकाश (Visible Light)
5️⃣ पराबैंगनी किरणें (Ultraviolet - UV)
6️⃣ X-किरणें (X-Rays)
7️⃣ गामा किरणें (Gamma Rays) → सबसे अधिक आवृत्ति

नियम:
जैसे-जैसे आवृत्ति बढ़ती है, ऊर्जा भी बढ़ती है और तरंगदैर्ध्य घटता है।


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अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?

❌ (B) रेडियो तरंगे, कॉस्मिक तरंग, UV, IR, गामा किरणें

इसमें कॉस्मिक तरंगों को गलत स्थान पर रखा गया है।

IR (अवरक्त) को UV के बाद रखा गया है, जो गलत है।


❌ (C) X-किरणें, रेडियो तरंग, कॉस्मिक तरंग, UV, गामा किरणें

रेडियो तरंगें X-किरणों से पहले होनी चाहिए थीं।

कॉस्मिक तरंगें गामा किरणों के बाद आती हैं।


❌ (D) गामा, UV, IR, रेडियो तरंग

IR (अवरक्त) को UV से पहले आना चाहिए था।

गामा तरंगों की आवृत्ति सबसे अधिक होती है, लेकिन यह शुरुआत में नहीं हो सकती।



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निष्कर्ष:

✅ सही क्रम:
अवरक्त (IR) → पराबैंगनी (UV) → X-किरणें → गामा किरणें

✅ सही उत्तर: (A) अवरक्त, UV, X-किरणें, गामा किरणें

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Q. मीटर सेतु में एक मीटर लम्बा तार कार्य करता है —
  • (A) अनुपातिक भुजा P तथा Q
  • (B) अनुपातिक भुजा R तथा S का
  • (C) केवल Q भुजा का
  • (D) केवल P भुजा का
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✅ Correct Answer: (A) अनुपातिक भुजा P तथा Q

Explanation: मीटर सेतु (Meter Bridge), जिसे व्हीटस्टोन ब्रिज (Wheatstone Bridge) का एक रूप माना जाता है, एक विद्युत परिपथ है जिसका उपयोग प्रतिरोध मापन के लिए किया जाता है।

मीटर सेतु में एक मीटर लंबा तार एक अनुपातिक भुजा के रूप में कार्य करता है।

मीटर सेतु की संरचना:

1. यह एक मीटर लंबी धातु की तार का उपयोग करता है।


2. यह तार दो भागों (P और Q) में विभाजित होता है।


3. P और Q के अनुपात के आधार पर अज्ञात प्रतिरोध (X) का मान ज्ञात किया जाता है।



? मीटर ब्रिज में अनुपातिक भुजाएँ:

मीटर ब्रिज में एक मीटर लंबा तार P और Q भुजाओं के रूप में कार्य करता है।

इस तार के दोनों हिस्सों की लंबाई का अनुपात प्रतिरोध ज्ञात करने में मदद करता है।

यह व्हीटस्टोन ब्रिज के सिद्धांत पर काम करता है:


P/Q = R/S


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अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?

❌ (B) अनुपातिक भुजा R तथा S का

R और S ज्ञात और अज्ञात प्रतिरोध होते हैं, लेकिन मीटर लंबा तार इनसे संबंधित नहीं होता।


❌ (C) केवल Q भुजा का

मीटर सेतु में तार P और Q दोनों भुजाओं में विभाजित होता है, सिर्फ Q में नहीं।


❌ (D) केवल P भुजा का

मीटर सेतु का तार केवल P नहीं, बल्कि P और Q दोनों का भाग होता है।



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निष्कर्ष:

मीटर सेतु में एक मीटर लंबा तार अनुपातिक भुजा P और Q के रूप में कार्य करता है।

✅ सही उत्तर: (A) अनुपातिक भुजा P तथा Q

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Q. सूर्य ग्रहण होता है जब –
  • (A) पृथ्वी, सूर्य और चन्द्रमा के बीच आ जाती है
  • (B) चन्द्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है
  • (C) सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा के बीच आ जाता हैं
  • (D) उपरोक्त में से कोई नहीं।
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✅ Correct Answer: (B) चन्द्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है

Explanation: सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुँचने से रुक जाता है।

? मुख्य बातें:

सूर्य ग्रहण केवल अमावस्या (New Moon) के दिन हो सकता है।

जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है, तो सूर्य ग्रहण होता है।

यह पूर्ण (Total), आंशिक (Partial), या वलयाकार (Annular) ग्रहण हो सकता है।



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अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?

❌ (A) पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है:

यह स्थिति चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) के लिए होती है, न कि सूर्य ग्रहण के लिए।


❌ (C) सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के बीच आ जाता है:

यह खगोलीय रूप से असंभव है क्योंकि सूर्य हमेशा सबसे बड़े दायरे में स्थित होता है।


❌ (D) उपरोक्त में से कोई नहीं:

(B) विकल्प पहले से ही सही है, इसलिए यह उत्तर गलत है।



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निष्कर्ष:

सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाता।

✅ सही उत्तर: (B) चन्द्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है

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Q. टयूब लाईट के कार्य करने का सिध्दांत है।
  • (A) गैसों का विद्युत विसर्जन
  • (B) विद्युत का उष्मीय प्रभाव
  • (C) विद्युत का चुम्बकीय प्रभाव
  • (D) स्वप्रेरण
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✅ Correct Answer: (A) गैसों का विद्युत विसर्जन

Explanation: ट्यूब लाइट का कार्य करने का सिद्धांत "गैसों का विद्युत विसर्जन" (Electrical Discharge of Gases) पर आधारित है।

ट्यूब लाइट कैसे काम करती है?

1️⃣ गैस से भरी होती है:

ट्यूब लाइट के अंदर आर्गन गैस (Argon) और कम दबाव वाली पारा वाष्प (Mercury Vapor) होती है।


2️⃣ विद्युत प्रवाह से आयनीकरण होता है:

जब ट्यूब लाइट को चालू किया जाता है, तो गैस आयनित हो जाती है और पारा वाष्प से पराबैंगनी (UV) किरणें निकलती हैं।


3️⃣ फास्फोरस कोटिंग दृश्य प्रकाश में बदलती है:

ट्यूब के अंदर की फास्फोरस कोटिंग UV किरणों को दृश्य प्रकाश (Visible Light) में बदल देती है।


इस प्रकार, ट्यूब लाइट गैसों के विद्युत विसर्जन के सिद्धांत पर कार्य करती है।


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अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?

❌ (B) विद्युत का उष्मीय प्रभाव:

यह बल्ब (Incandescent Bulb) के लिए सही है, जिसमें फिलामेंट गर्म होकर रोशनी देता है।


❌ (C) विद्युत का चुंबकीय प्रभाव:

यह मोटरों और ट्रांसफार्मर में कार्य करता है, ट्यूब लाइट में नहीं।


❌ (D) स्वप्रेरण:

यह इंडक्टर और चोक कॉइल में होता है, ट्यूब लाइट के सीधे कार्य में नहीं आता।



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निष्कर्ष:

ट्यूब लाइट में गैसों के विद्युत विसर्जन की प्रक्रिया होती है, जिससे पराबैंगनी किरणें निकलती हैं और फास्फोरस कोटिंग के कारण सफेद रोशनी उत्पन्न होती है।

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Q. दीर्घ दृष्टि दोष के निवारण हेतु लेते हैं।
  • (A) उत्तल लैंस
  • (B) अवतल लैंस
  • (C) बेलनाकार लैंस
  • (D) साधारण लैंस
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✅ Correct Answer: (A) उत्तल लैंस
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Q. धारिता की इकाई है –
  • (A) कूलॉम
  • (B) वोल्ट
  • (C) हेनरी
  • (D) फैरेड
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✅ Correct Answer: (D) फैरेड

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