Q. अभिप्रेरणा का प्रत्याशा सिद्धांत किसके द्वारा दिया गया
  • (A) विक्टर ब्रूम
  • (B) स्किनर
  • (C) हर्ज वर्ग
  • (D) एलन
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✅ Correct Answer: (A) विक्टर ब्रूम

Explanation:

विक्टर ब्रूम का प्रत्याशा सिद्धांत (Expectancy Theory) इस बात पर आधारित है कि लोग अपने प्रयासों को केवल तब निर्देशित करेंगे जब वे यह मानते हैं कि उन प्रयासों के परिणामस्वरूप उन्हें वांछित पुरस्कार या लाभ मिलेगा। यह सिद्धांत अभिप्रेरणा को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करता है और यह मानता है कि व्यक्ति अपने कार्यों को इस विचार से प्रेरित करते हैं कि उनके प्रयासों से क्या परिणाम मिलेगा।

इस सिद्धांत के अनुसार, अभिप्रेरणा तीन मुख्य घटकों पर निर्भर करती है:

प्रत्याशा (Expectancy): यह विश्वास है कि यदि वे अपने प्रयासों को लागू करेंगे, तो उन्हें एक निश्चित परिणाम मिलेगा। यह व्यक्ति के खुद के कौशल और स्थिति के आधार पर होता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी को विश्वास है कि कठिन प्रयासों के बाद वे अच्छा प्रदर्शन करेंगे, तो वे प्रेरित होंगे।

साधन-परिणाम (Instrumentality): यह विश्वास है कि एक विशेष परिणाम के लिए सफल प्रयास के बाद व्यक्ति को वांछित पुरस्कार मिलेगा। उदाहरण के लिए, यदि कर्मचारी को यह विश्वास है कि अच्छा प्रदर्शन करने पर उन्हें बोनस या पदोन्नति मिलेगी, तो यह उसकी प्रेरणा को प्रभावित करेगा।

मूल्य (Valence): यह व्यक्ति के लिए पुरस्कार या परिणाम के मूल्य को दर्शाता है। व्यक्ति यह तय करता है कि उसे जो पुरस्कार मिल रहा है, वह उसकी प्राथमिकताओं और इच्छाओं के अनुरूप है या नहीं। यदि पुरस्कार का मूल्य ज्यादा है, तो व्यक्ति अधिक प्रेरित होगा।

इन तीन घटकों का संयोजन व्यक्ति की कुल अभिप्रेरणा को प्रभावित करता है। यदि इन तीनों घटकों में से किसी एक घटक की कमी हो, तो व्यक्ति की प्रेरणा कमजोर हो सकती है।

विक्टर ब्रूम का यह सिद्धांत यह बताता है कि लोग अपने कार्यों को केवल तभी लागू करेंगे जब उन्हें यह विश्वास होगा कि उनका प्रयास उन्हें एक उचित और वांछित परिणाम देगा।

Q. पियाजे के सिद्धांत के अनुसार प्राकसंक्रियात्मक अवस्था की अवधि है
  • (A) 4 से 8 साल
  • (B) जन्म से 2 साल
  • (C) 2 से 7 साल
  • (D) 5 से 8 साल
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✅ Correct Answer: (C) 2 से 7 साल

Explanation:

पियाजे का प्राकसंक्रियात्मक अवस्था (Preoperational Stage), उनकी संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत का दूसरा चरण है, जो बच्चों के मानसिक विकास की प्रक्रिया को समझाता है। यह अवस्था 2 से 7 साल के बच्चों के बीच होती है।

इस अवस्था में बच्चों के मानसिक विकास में कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएँ देखी जाती हैं:

1. प्रतीकात्मक सोच (Symbolic Thinking):

  • बच्चों में इस उम्र में प्रतीकात्मक सोच विकसित होती है, यानी वे किसी वस्तु, व्यक्ति, या घटना के बारे में मानसिक रूप से सोच सकते हैं, भले ही वह वस्तु उनके सामने न हो। उदाहरण के लिए, बच्चे कल्पना की दुनिया में खेल सकते हैं, जैसे कि खिलौनों को "बोलने" या "चलाने" के रूप में मानना।

2. संकल्पना (Egocentrism):

  • इस अवस्था में बच्चे स्वकेंद्रित होते हैं और वे केवल अपनी दृष्टिकोण से ही चीजों को समझते हैं। उन्हें यह समझने में मुश्किल होती है कि दूसरे लोग क्या महसूस करते हैं या उनका दृष्टिकोण क्या हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर एक बच्चा किसी को देखता है, तो उसे लगता है कि वह व्यक्ति वही देख रहा होगा जो वह देख रहा है।

3. द्रव्यमान और संख्या की अस्थायीता (Conservation):

  • इस अवस्था में बच्चे यह नहीं समझ पाते कि किसी वस्तु की मात्रा, आकार, या संख्या उसके रूप बदलने से नहीं बदलती। उदाहरण के लिए, अगर पानी को एक संकरी, लंबी बोतल से एक चौड़ी कटोरी में डाला जाए, तो बच्चों को लगता है कि उसमें पानी की मात्रा बढ़ गई है, जबकि वास्तव में वह समान रहती है।

4. केंद्रित सोच (Centration):

  • बच्चे किसी एक पहलू पर ध्यान केंद्रित करते हैं और बाकी पहलुओं की अनदेखी करते हैं। उदाहरण के लिए, उन्हें यह समझने में कठिनाई होती है कि यदि कोई बच्चा दूसरे बच्चों से बड़ा दिखता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह हमेशा उम्र में बड़ा होगा।

5. सम्बंधों की कल्पना (Animism):

  • बच्चे इस उम्र में वस्तुओं को भी जीवन्त और संवेदनशील मानने लगते हैं। उदाहरण के लिए, वे यह मान सकते हैं कि खिलौने या अन्य निर्जीव वस्तुएं भी सोच सकती हैं या महसूस कर सकती हैं।

सारांश:

पियाजे के अनुसार, प्राकसंक्रियात्मक अवस्था में बच्चों का सोचने का तरीका बहुत हद तक असंवेदनशील और आदर्शवादी होता है। हालांकि, इस अवस्था में बच्चों का मानसिक विकास तेजी से हो रहा होता है, और वे अधिक जटिल मानसिक प्रक्रियाओं को समझने के लिए तैयार होते हैं।

इसलिए, इस अवस्था को समझने से यह स्पष्ट होता है कि बच्चों का सोचने और समझने का तरीका वयस्कों से अलग होता है, लेकिन इसमें बच्चों के मानसिक विकास के महत्वपूर्ण कदम होते हैं।

Q. गिरोह अवस्था किस आयु वर्ग एवं विलंब विकास से संबंधित है
  • (A) 16 se 19 वर्ष एवं नैतिकता
  • (B) 3 से 6 वर्ष एवं भाषा
  • (C) 8 से 10 वर्ष एवं सामाजिकरण
  • (D) 16 से 19 वर्ष एवं संज्ञानात्मक
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✅ Correct Answer: (C) 8 से 10 वर्ष एवं सामाजिकरण

Explanation:

गिरोह अवस्था (Gang Age) 8 से 10 वर्ष के आयु वर्ग से संबंधित होती है और यह सामाजिकरण (Socialization) से जुड़ी होती है।

इस अवस्था में बच्चे समाजिक रूप से अधिक सक्रिय होते हैं, वे समूहों में खेलते हैं और अपने साथियों के साथ घुलमिल कर रहते हैं, जिससे उनकी सामाजिक संबंधों की समझ और सामाजिक कौशल विकसित होते हैं।

इसलिए, सही उत्तर है:
(C) 8 से 10 वर्ष एवं सामाजिकरण

Q. पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास के तृतीय अवस्था निम्न में से कौन सा है
  • (A) औपचारिक संक्रिया अवस्था
  • (B) पूर्व संक्रिया अधिकारी अवस्था
  • (C) मूर्त संक्रिया अवस्था
  • (D) संवेदनात्मक गामक अवस्था
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✅ Correct Answer: (C) मूर्त संक्रिया अवस्था

Explanation:

पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास के तृतीय अवस्था "मूर्त संक्रिया अवस्था" (Concrete Operational Stage) है।

यह अवस्था 7 से 11 वर्ष तक के बच्चों में देखी जाती है, जिसमें बच्चे मानसिक रूप से अधिक जटिल विचार कर सकते हैं और वे वास्तविक, ठोस (concrete) विचारों के आधार पर समस्याओं को हल करने में सक्षम होते हैं।

इस अवस्था में बच्चे साधारण लॉजिक का उपयोग करने में सक्षम होते हैं, जैसे कि संरक्षण (conservation) और वर्गीकरण (classification) की समझ, लेकिन वे अभी भी अधिक अमूर्त (abstract) विचार नहीं कर सकते।

इसलिए, सही उत्तर है:
(C) मूर्त संक्रिया अवस्था

Q. निम्न में से कौन सा संवेग का तत्व नहीं है
  • (A) व्यवहारात्मक
  • (B) दैहिक
  • (C) संज्ञानात्मक
  • (D) संवेदी
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✅ Correct Answer: (D) संवेदी

Explanation:

संवेग (Emotion) के तीन प्रमुख तत्व होते हैं:

व्यवहारात्मक: यह उस क्रिया को दर्शाता है जो हम अपने संवेगों के आधार पर करते हैं, जैसे कि गुस्से में चिल्लाना या खुशी में हंसना।

दैहिक: यह हमारे शरीर में होने वाले शारीरिक बदलावों से संबंधित होता है, जैसे दिल की धड़कन बढ़ना, पसीना आना, या चेहरे पर परिवर्तन।

संज्ञानात्मक: यह हमारे संवेगों को समझने और उन्हें मान्यता देने के साथ जुड़ा होता है, जैसे कि हम किसी स्थिति को किस रूप में महसूस करते हैं या उसे कैसे समझते हैं।

संवेदी (Sensory) तत्व संवेग का एक हिस्सा नहीं होता है, क्योंकि यह हमारी इंद्रियों से संबंधित है, जो संवेगों के अनुभव का एक हिस्सा नहीं होते।

इसलिए, (D) संवेदी संवेग का तत्व नहीं है।

Q. अग्रिम व्यवस्थापक प्रतिमान किस परिवार से संबंधित है
  • (A) व्यक्तिगत
  • (B) सामाजिक अंत क्रिया
  • (C) सूचना प्रक्रिया करण
  • (D) व्यवहार परिमार्जन
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✅ Correct Answer: (C) सूचना प्रक्रिया करण

Explanation:

अग्रिम व्यवस्थापक प्रतिमान (Executive Management Model) सूचना प्रक्रिया करण (Information Processing) परिवार से संबंधित है।

यह प्रतिमान इस विचार पर आधारित है कि व्यक्ति अपने मानसिक संसाधनों का उपयोग कैसे करते हैं, जैसे ध्यान, स्मृति और सोचने की प्रक्रिया, और यह कैसे उनकी निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है। इसमें यह देखा जाता है कि एक व्यक्ति सूचना को कैसे प्रोसेस करता है, उसका संगठन और उपयोग कैसे करता है।

इसलिए, सूचना प्रक्रिया करण (Information Processing) परिवार से संबंधित है।

Q. निम्न में से कौन सी बाद की बल्यावस्था को है बौद्धिक विकास की विशेषता नहीं है
  • (A) भविष्य की योजना की सूझबूझ
  • (B) विज्ञान की काल्पनिक कथाओं में अधिक रूचि
  • (C) बढ़ती हुई तार्किक शक्ति
  • (D) काल्पनिक भयों का अंत
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✅ Correct Answer: (A) भविष्य की योजना की सूझबूझ

Explanation:

बल्यावस्था (Adolescence) में बौद्धिक विकास की विशेषता भविष्य की योजना की सूझबूझ नहीं होती। इस उम्र में बच्चे अभी भी वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हैं और दीर्घकालिक योजनाओं के बारे में सोचने की क्षमता पूरी तरह से विकसित नहीं होती।

वहीं, विज्ञान की काल्पनिक कथाओं में अधिक रुचि इस उम्र में आमतौर पर बच्चों में देखने को मिलती है, क्योंकि वे कल्पना और वास्तविकता के बीच अंतर को समझने में सक्षम होते हैं।

इसलिए, सही उत्तर (A) भविष्य की योजना की सूझबूझ है

Q. इनमें से कौन मनोवैज्ञानिक भाषा विकास से संबंधित है
  • (A) पेवलव
  • (B) विने
  • (C) चो मस्की
  • (D) मास्लो
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✅ Correct Answer: (C) चो मस्की

Explanation:

नोम चोम्स्की भाषा के विकास से संबंधित प्रमुख मनोवैज्ञानिक हैं। उनका "इनहेरेंट सिद्धांत" (Inherent Theory) यह मानता है कि बच्चे जन्म से ही भाषा को सीखने की क्षमता के साथ आते हैं। उनका मानना था कि मानव मस्तिष्क में भाषा सीखने के लिए एक विशेष तंत्र (Language Acquisition Device, LAD) होता है, जो बच्चों को भाषा सीखने में मदद करता है।

अन्य विकल्पों में:

  • पेवलव: प्रसिद्ध क्लासिकल कंडीशनिंग के लिए जाने जाते हैं, जो व्यवहारिक विकास से संबंधित है।
  • विने: वे संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के लिए प्रसिद्ध हैं, विशेष रूप से बच्चों की मानसिक विकास प्रक्रियाओं के बारे में।
  • मास्लो: वे आवश्यकताओं की श्रेणी (Hierarchy of Needs) के लिए प्रसिद्ध हैं, जो मानव प्रेरणा और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित है।

इसलिए, चो मस्की भाषा विकास से संबंधित मनोवैज्ञानिक हैं।

Q. ठंडा एक ने अपनी सिद्धांत को किस शीर्षक से सिद्ध किया था
  • (A) संज्ञानात्मक अधिगम
  • (B) अधिगम के प्रयास एवं भूल
  • (C) संकेत अधिगम
  • (D) स्थान अधिगम
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✅ Correct Answer: (B) अधिगम के प्रयास एवं भूल

Explanation:

ठंडा (Thorndike) ने "अधिगम के प्रयास एवं भूल" (Trial and Error Learning) सिद्धांत को प्रस्तुत किया था। उनके अनुसार, जीव अपनी गलतियों और प्रयासों से सीखते हैं। जब किसी कार्य को करने में कोई विशेष प्रयास सफल होता है, तो उसे जीव भविष्य में दोहराता है।

यह सिद्धांत मुख्य रूप से "सिद्धांत का कानून" (Law of Effect) पर आधारित था, जिसमें उन्होंने यह कहा था कि जो भी व्यवहार सकारात्मक परिणाम देता है, वह अधिक बार दोहराया जाता है, जबकि जो नकारात्मक परिणाम देता है, वह व्यवहार कम किया जाता है।

इसलिए, (B) अधिगम के प्रयास एवं भूल सही उत्तर है।

Q. निम्न में से अधिगम में योगदान देने वाले मनोवैज्ञानिक कारकों में कौन सा शामिल नहीं है
  • (A) अधिगम की इच्छा
  • (B) प्रेरणा
  • (C) रुचि
  • (D) विषय वस्तु का स्वरूप
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✅ Correct Answer: (D) विषय वस्तु का स्वरूप

Explanation:

अधिगम में योगदान देने वाले मनोवैज्ञानिक कारकों में अधिगम की इच्छा, प्रेरणा, और रुचि शामिल होते हैं, क्योंकि ये कारक व्यक्ति की सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।

विषय वस्तु का स्वरूप विशेष रूप से पाठ्य सामग्री या पाठ्यक्रम की संरचना से संबंधित होता है, लेकिन यह मनोवैज्ञानिक कारकों में शामिल नहीं होता।

इसलिए, (D) विषय वस्तु का स्वरूप अधिगम में योगदान देने वाला मनोवैज्ञानिक कारक नहीं है।

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